मंगलवार, 2 जनवरी 2018

लेखन क्या है तथा यह कितने प्रकार का होता है?

नोट: यह आलेख खासकर पत्रकारिता के विद्यार्थीयो के लिये है।

लेखन क्या है?
यह एक प्रतिभा-सम्पन्न कला हैं। जो लेखक के द्वारा स्वत: स्फुर्त होती हैं यानी अपने आप लिखने के विचार ऐसे आते है कि आखिरकार लेखक को उन विचारो को कलम के द्वारा शब्दो से एक मूर्त रूप कागज पर देना पड़ता हैं।हम यहां पत्रकारिता के लेखन की बात कर रहे है ,ना की कॉलेज व स्कुलो मे लिखित लेखन।
क्या आपने कभी सोचा है की लेखक किसी लेख को कब लिखता है? आखिरकार उसकी कलम से इतने शब्द निकलते कैसे है?

देखीए, कोई भी लेखक या एक पत्रकार ,जब किसी मुद्दे से गहरा जुड़ जाता हैं तो वह उसके बारें में अपने विचारो के द्वारा उधेड़बीन मे लगा रहता हैं। कभी कभार कोई बात गलत होती है परन्तु उसके खुद के पास तर्क या उस मुद्दे से जुड़ी भावनाएँ हैं। उसे लेख में बदल डालता हैं। इसी तरह से वो लिखते रहते हैं।
एक बात बहुत ध्यान देने योग्य हैं की लेखक/पत्रकार बहुत संवेदनशील होते हैं तथा आस-पास क्या हो रहा है यह भांपने की बड़ी क्षमता रखते हैं। उसी से तो लेख बनते हैं।
कहानियां भी इसी आधार लिखी जाती हैं।

✒लेखन दो प्रकार का होता हैं।
   1. सृजनात्मक लेखन
   2. वर्णात्मक लेखन

आईये इनका विस्तार से अध्ययन करते हैं।
📝सृजनात्मक लेखन:
                        यह खासकर अध्यात्मिक होता हैं। लेकिन इसे केवल अध्यात्मिकता की परिभाषा मे बांधकर रखना ठीक नहीं हैं। इसके अलावा इस तरह के लेखन में केवल सुचनाएं ही नही अपितु रहस्य व रसो को भी उद्भवित होता  हैं। कभी -कभी लेखक भावो को कहांनियो में भरता हैं।साथ ही लेख में शान्ति,प्यार,ईश्वरीयता आदि को डालने का प्रयास करता हैं
सामान्यत: सृजनात्मक लेखन में लेखक अपने दिल की करीबी घटनाएं, आस-पास आ रही सामाजिक समस्याओ को दिल से उठाता हैं।
                      संक्षेप में इसे समझना हैं तो ,निम्न तीन बातों को ध्यान में रखकर समझ सकते हैं
1.लेख पाठक को आकर्षित करता हो
2.उसे पढ़ने के लिए रूचि व जाग्रति पैदा करता हो
3. पाठक तक संदेश स्पष्टता से पहुंच जाये।

अगर यह तीनो बातें किसी लेख में है वो तो सृजनात्मक लेखन हैं।

📝वर्णात्मक लेखन :
                          इसमे साधारण रूप से सन्देश होता हैं।यह
उदारण के लिए, कविता सृजनात्मक लेखन हैं। उसके भावो का वर्णन ,एक वर्णात्मक लेखन हैं।

मैने यह पोस्ट लिखी है तो यह भी वर्णात्मक हैं। क्योकी मैने लेखन को किताब से समझा और आपके सामने वर्णित कर दिया।
         परन्तु ध्यान दे की उपरोक्त लिखी तीन बातें(सृजनात्मक लेखन के कॉलम में) मेरे इस लेख मे है तो यह सृजनात्मक लेखन हो सकता हैं। हांलाकि मुझे नही लगता हैं। क्योकि मैने इस लेख को सृजित करने में कोई मेहनत नही की हैं।

ध्यान दे ,अभी भी आपको सृजनात्मक व वर्णात्मक लेखन में कन्फ्युजन(संदेह,) हैं तो

सिर्फ इन तीन बातो का ध्यान रखे👇

1.लेख पाठक को आकर्षित करता हो
2.उसे पढ़ने के लिए रूचि व जाग्रति पैदा करता हो
3. पाठक तक संदेश स्पष्टता से पहुंच जाये।

अगर उपर तीनो लिखी बाते आपको एक साथ किसी लेख में नजर आ रही है तो वो सृजनात्मक लेखन हैं

और नही आ रही हैं तो वर्णात्मक लेखन हैं।

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