सत्ता की भूख इंसान पर किस कदर हावी हो जाती है,यह इस बार गुजरात चुनावी राजनीति में सबको देखने मिल रहा है। चाहे कुछ भी हो जाये बस सत्ता नही जानी चाहिए।बस यही चाहत है हर नेताजी की। गुजरात का नाम आते ही नमो-नमो जरूर सामने स्मृति पटल पर आ जाता है।चाहे वो नमो चाय हो या फिर नारा तथा मित्रो ! BJP ने 2014 का चुनाव भी गुजरात मॉडल पर लड़ा था। जिसमे ऐतिहासिक जीत मिली। इसलिए अब प्रश्न यह उठता है की इस गुजरात का चुनाव में विकास मॉडल कहाँ चला गया। माननीय PM साहब को आखिर आंसू बहा के "मै गुजरात का बेटा हुँ।" क्यो कहना पड़ रहा है? यह तो सबको पता है की भाषण के धुरेन्धर मोदी जी गुजरात से है। अगर वाकई विकास हुआ है तो विकास को जनता के सामने क्यो नही रखते, भावुक मुद्दो के बजाय। आखिर योगी ,PM को आने की कहां जरूरत थी। और इधर से राहुल बाबा मंदिर -मंदिर क्यो भटकते फिर रहे है। कांग्रेस तो हमेशा अपने को सेकुरलिज्म कहती नही थकती थी तो फिर अब कह रही है की हमारे य...
अणदाराम बिश्नोई का ब्लॉग