शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

युवाओं में गुस्सा, कहा- राजनेताओं के बेटों को भेजों बॉर्डर पर

#पुलवामा अटैक : India Gate पर युवाओं का आक्रोश, बोलें - सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, वॉर हो

यदि वीडियो प्ले होने मेंं दिक्कत हो रही हैंं तो इसे आप Youtue पर देख सकते हैं ( यहां क्लिक करें)

शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2019

अरविंद केजरीवाल बनाम एलजी : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अपडेट्स

यदि वीडियो यहांं पर प्ले नहींं हो रहा हैंं तो आप इसे यहां क्लिक कर Youtube से‌ देख सकते हो।

इंटरव्यू : बक्सर से बीजेपी नेता बिनोद चौबें

यदि यह वीडियों यहांं पर प्ले नहींं हो रहा हैंं तो आप इसे Youtube पर देख सकते हो।

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

मंगलवार, 29 जनवरी 2019

क्या बैंको का लोन आम आदमी के लिये विज्ञापनो तक ही सिमित है?

बैंको के लोन देने का विज्ञापन आपने जरूर देखे होगें। इन विज्ञापनो को देखकर एक बार तो हम जैसे आम आदमी को तसल्ली जरूर मिलती है की कहीं लोन लेकर छोटे कारोबार को आगे बढ़ा सकते हैं।
जब लोन के पुछताछ के लिए बैंक मैनेजर से बात का सिल-सिला शुरू होता हुआ ,आखिरकार  यह बात का सिल-सिला निराशा का मोड़ ले लेता हैं। कह देते है मेरा ट्रान्सफर होने वाले है या अभी काम ज्यादा हैं एक महीने बाद आना  ,इस तरह के  न जाने मैनेजर और क्या क्या बहाना बनाता हैं।
मेरे साथ भी यही हुआ जब मै अपनी SBI होम ब्रांच(घर के नजदीक) में कॉलेज के द्वारा भेजे कागजात लेकर पत्रकारिता की स्नातक डिग्री के लिए लोन लेने गया।
आखिर क्यो आम आदमी के साथ यह छलावा किया जा रहा हैं। बड़े बड़े उद्योगपत्तियो को हजार करोड़ो में लोन आसानी से मिल जाता हैं। हम जैसे को केवल 4 लाख का लोन देने से भी कतराते हैं, जबकि हम लोन की सारी शर्ते पुरी करते ।

अभी विजय माल्या के बाद नीरव मोदी 11400 करोड़ के आस पास की बड़ी रकम लोन के रूप में डकार कर विदेश भाग गया। उसकी सारी संपति जब्त करे तो भी लोन उसका मात्र 20% रूपया कवर होगा  बाकी 80% रूपये तो कभी नही दे पायेगा। सरकार का तो क्या गया? वो तो अपना पांच साल राज करेगी ,और चली जायेगी। कुछ गया तो देश के ईमानदार लोगो के खुन-पसीने की कमाई के टैक्स का पैसा।

आम आदमी के लिए बैंको का लोन केवल विज्ञपन तक ही सिमित हैं।क्योकि बैंको से लोन लेने के लिए मैनेजर को राजी करना काफी मुश्किल काम हैं। आप और हम जैसे तो कर भी नही पाते हैं। कर पाते है तो सिर्फ वहीं जिनकी नेताओ व बड़ो लोगो से जान पहचान होती हैं। या फिर वही कर पाता है जिनकी खुद की पॉकेट गर्म होती है।
रामनगर उत्तराखण्ड के रहने वाले छोटे कारोबारी एन के ध्यानी बताते है कि  "बैक लोन लेना मतलब लोहे के चने चबाने के बराबर हैं। पिछले 10 साल से लगातार एक रिमोट एरिया उत्तराखंड में अपना इलैक्ट्रानिक उद्योग सुचारू रूप से चला रहा हूँ। और मेरा बैंक पिछले 10 साल से मेरे कारोबार से सन्तुष्ट है। लेकिन मैं जब भी कारोबार को बढ़ाने की कोशिश करता हूँ तो बैंक मैनेजर बहाने बना कर लोन बढ़ाने से टाल देते हैं। सरकार विज्ञापन देकर जनता को गुमराह करते रहती है। वैगैर लेनदेन या जानपहचान के बिना किसी को लोन मिलना बड़ा मुश्किल काम है।"

ध्यानी अकेले इस समस्या से परेशान नहीं हैं ।इस तरह से न जाने कितने छोटे कारोबारी अपने कारोबार को उड़ान नही दे पाते हैं। मुद्दा बड़ा गंभीर हैं। इसलिए सरकार को विचार कर बैंकिंग की लोन प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कानुन बनाने को सोचना चाहिए।
लेखक व काव्य-सृजनकर्ता पुर्ण चन्द्र कान्दपाल कहते हैं की "बैंक के व्यवहार में जब तक बदलाव नहीं आएगा बैंक नहीं सुधर सकते । नियम के अनुसार बैंक कर्मियों को ग्राहक से शाखा में आने पर नमस्ते कहनी चाहिए । यह भी कहते हैं कि ग्राहक भगवान है । अपवाद को छोड़कर अधिकांश सरकारी बैंक कर्मी ग्राहक को आदमी तक नहीं समझते जबकि गैर-सरकारी बैंक ठीक से व्यवहार करते हैं । याद रखिये आप बैंकों को पुनः निजीकरण की ओर ले जा रहे हैं।"

वहीं, हाल नई दिल्ली में रहने वाले स्व-व्यवसायी संजीव कोहली बताते हैं कि "मै अब तक 6 बैंको में मुद्रा-लॉन के लिए आवेदन कर चूका हुँ..…वो भी LLP पंजीकृत हैं कंपनी....कोई ना कोई बहाना कर के लॉन देने से मना कर देते हैं।"
यह थी कुछ शख्स की व्यथा, अगर आप पुछने निकलोगो तो लाखो लोग ऐसी शिकायते करते मिल जायेगे। अब इसे बैंकिग सिस्टम की भ्रष्ट्रचार को पनाह देने वाली खाँमि न कहे तो और क्या कहे? क्योकि जरूरत मन्दो को लोन दिया नही जाता है और नीरव व विजया माल्या जैसो को लॉन देने के लिए बिना कुछ जांचे , पुरा बैंक ही  उन्हे सौंप देते हैं।
•••••••••
लेखक व सम्पादक : अणदाराम विश्नोई ' पत्रकारिता विद्यार्थी'

--------------------

🆓 आप अपना ई- मेल डालकर हमे free. में subscribe कर ले।ताकी आपके नई पोस्ट की सुचना मिल सके सबसे पहले।
⬇⏬subscribe करने के लिए इस पेज पर आगे बढ़ते हुये ( scrolling) website के अन्त में जाकर Follow by Email लिखा हुआ आयेगा । उसके नीचे खाली जगह पर क्लिक कर ई-मेल डाल के submit पर क्लिक करें।⬇⏬
फिर एक feedburn नाम का पेज खुलेगा।  वहां कैप्चा दिया हुआ होगा उसे देखकर नीचे खाली जगह पर क्लिक कर उसे ही लिखना है। फिर पास में ही " ♿complate request to subscription" लिखे पर क्लिक करना है।
उसके बाद आपको एक ई मेल मिलेगा। जिसके ध्यान से पढकर पहले दिये हुये लिंक पर क्लिक करना है।
फिर आपका 🆓 मे subscription.  पुर्ण हो जायेगा।

आपको यह पोस्ट कैसा लगा, कमेन्ट बॉक्स मे टिप्पणी जरूर कीजिए।।साथ ही अपने दोस्तो के साथ पोस्ट को शेयर करना मत भूले। शेयर करने का सबसे आसान तरीका-
☑ सबसे पहले उपर साइट मे "ब्राउजर के तीन डॉट पर " पर क्लिक करें करें।
☑ फिर  "साझा करे या share करें पर " लिखा हुआ आयेगा। उस पर क्लिक कर लिंक कॉपी कर ले।
☑ फिर फेसबुक पर पोस्ट लिखे आप्शन में जाकर लिंक पेस्ट कर दे।इसी तरह से whatsapp. पर कर दे।
आखिर शेयर क्यो करे ❔- क्योकी दोस्त इससे हमारा मनोबल बढ़ेगा।हम आपके लिए इसी तरह समय निकाल कर महत्वपुर्ण पोस्ट लाते रहेगे। और दुसरी बड़ा फायदा Knowledge बांटने का पुण्य। इस पोस्ट को शेयर कर आप भी पुण्य के भागीदार बन सकते है। देश का मनो-विकास होगा ।
तो आईये अपना हमारा साथ दीजिए तथा हमें "Subscribes(सदस्यता लेना) " कर ले    अपना ईमेल डालकर।
💪इसी तरह देश हित की कलम की जंग का साथ देते रहे।👊

शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

एसएससी परीक्षा : 'युवा हल्लाबोल' की जीत, सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई समिति

• एसएससी मामले में युवा-हल्लाबोल की एक और जीत, परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई एक्सपर्ट समिति
• युवा-हल्लाबोल ने प्रेस कांफ्रेंस कर चेताया था सरकार को, बेरोज़गारी ख़त्म करने का पेश किया था रोडमैप
• 12 जनवरी को युवा हल्लाबोल के छात्र विवेकानंद जयंती पर करेंगे देश के 40 से ज्यादा शहरों में युवा-पंचायत, बेरोजगारी और परीक्षाओं में हो रही धांधली को लेकर बनाए मांगपत्रक को छात्रों से कराएंगे एडाप्ट
• 27 जनवरी को दिल्ली में होगा यूथ समिट, बेरोजगारी दूर करने के लिए देशव्यापी अभियान चलाएगा युवा-हल्लाबोल


युवा हल्लाबोल, ssc scam,

दिल्ली, 10 जनवरी। एसएससी परीक्षाओं में होने वाली धांधली और भ्रष्टाचार के सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका की आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। छात्रों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पेश हुए और सरकार के हठधर्मी रवैये के खिलाफ एक बड़ी जीत हासिल की।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और स्वराज अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया और कहा कि यह समिति भविष्य में होने वाली परीक्षाओं में सुधार संबंधी सुझाव देगी। अदालत ने समिति सदस्यों के तौर पर इंफोसिस के पूर्व चेयरमैन नंदन नीलकेणी और कंप्यूटर वैज्ञानिक विजय भाटकर के नामों की तत्काल घोषणा कर दी, जबकि तीसरे सदस्य के नाम के लिए युवा-हल्लाबोल के याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण से सुझाव मांगा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि एसएससी मामले में जो सीबीआई जांच चल रही है, उसमें क्या प्रगति है, कितने आरोपी पकड़े गए और छानबीन का परिणाम अब तक क्या निकला। वहीं अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि SSC CGL 2017 की परीक्षा को क्यों न रद्द कर दिया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 13 जनवरी को में होगी।

गौरतलब है कि युवा-हल्लाबोल ने दो दिन पहले ही 8 जनवरी को दिल्ली के प्रेस क्लब में एसएससी परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ी समेत बेरोजगारी खत्म करने को लेकर प्रेस कांफ्रेंस किया था। प्रेस कांफ्रेंस के अगले दिन 9 जनवरी को युवा-हल्लाबोल के छात्रों-युवाओं ने अपनी मांगों को पूरा करने और राज्यसभा में बैठे सांसदों को अपनी आवाज सुनाने के लिए संसद भवन पर भी प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस द्वारा छात्रों की धरपकड़ भी हुई।

युवा-हल्लाबोल का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने कहा कि दिल्ली के एसएससी हेडक्वार्टर से छात्रों का जो जोरदार आंदोलन शुरु हुआ, उसके बाद से ही लगातार युवा हल्लाबोल के साथी एसएससी के भ्रष्टाचार के खिलाफ और रोजगार की गारंटी के लिए संघर्षरत हैं। इस लंबी लड़ाई की यह पहली जीत है कि आज सुप्रीम कोर्ट ने समिति बनाने की हमारी मांग मान ली। हमें उम्मीद है कि समिति बनाने से भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के खात्मे और पेपर लीक की मॉडस आपरेंडी पर रोक लग पाएगी।

एसएससी परीक्षा के माध्यम से सीबीआई, रेलवे, विदेश मंत्रालय, जीएसटी, गृह मंत्रालय, डाक विभाग, सीएजी जैसे विभागों में अभ्यर्थियों को नौकरी मिलती है। SSC CGL में तीन चरणों की परीक्षा के बाद अंतिम रूप से चयनित होते हैं। 2017 की परीक्षा जिसपर धांधली का आरोप लगाया गया में इन तीनों चरणों की परीक्षा हो चुकी है।

युवा-हल्लाबोल से जुड़े अमित कुमार के मुताबिक बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में युवा हल्लाबोल की टीम रोज़गार के अवसर और चयन प्रणाली में सुधार को लेकर व्यापक अभियान चला रही है।
दिल्ली टीवी न्यूज़ नेटवर्क