शनिवार, 4 जुलाई 2020

पीएम मोदी का लेह जाना जरूरी था, सेना का मनोबल बढ़ा !

भारत और चीन के बीच तनातनी जारी है। इसी बीच पीएम मोदी का लद्दाख के लेह पहुंचने से हर कोई चौंक गया। पीएम ने छाती ठोक कर कहा कि गलवान घाटी हमारी हैं। दुश्मनों के इरादों को नेस्तनाबूद किया। सेना के जवानों के पराक्रम पर पूरे देश को नाज़ हैं। 
Pm Modi Ka leh daura,
लद्दाख के लेह में जवानों के बीच पीएम मोदी

पीएम मोदी के यह शब्द वाकई में सेना के जवानों के लिए किसी एनर्जी बूस्टर से कम नहीं हैं। पीएम मोदी के लेह जाने से चीन को सख्त संदेश गया है। चीन के आका जिनपिंग बाबू को किसी तरह की गलत फहमी नहीं पाले। पीएम मोदी के लेह से जवानों को संबोधन में साफ जाहिर हो गया।

यह सच हैं कि चीन, भारत से कई गुना सैन्य तौर पर शक्तिशाली है। चीन के पास आधुनिक तकनीक से लैस ढेरों हथियार और युद्ध का साजों सामान हैं।  लेकिन भारत भी अब 1962 वाला नहीं रहा है। परिस्थितियां समेत कई चीजें बदली हैं। तभी तो भारत ने बिना किसी देर किए चीन पर डिजिटल स्ट्राइक की और एक झटके में 59 चीनी ऐप को बैन कर दिया।

दूसरा पहलू यह भी है कि गालवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 जवानों को शहीद होना पड़ा। वही चीन के करीब 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए। भले ही भारत  को नुकसान कम हुआ हो, सैनिकों  की शहादत पर देशवासियों ...
का खूब खून उबला। चीनी सामानों बहिष्कार करने मांगे तेज हुई। चीन के खिलाफ देशभर में गुस्सा देखा जा रहा है। इसी को देखते भारत सरकार ने कई चीनी कंपनियों के साथ करार खत्म कर दिया। चीनी ऐप बैन कर दिए।

सियासत भी खूब हुई। राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई दिग्गजों ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए। राहुल बार बार यही पूछते दिखे कि आखिर वर्तमान में LAC पर हालात क्या है ? क्या चीन ने अभी भी कब्जा कर रखा है? सत्ताधारी बीजेपी के प्रवक्ताओं ने यह जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया कि कांग्रेस को सेना पर भरोसा नहीं है। इसलिए ऐसे सवाल पूछ रही हैं।

लेकिन यह सवाल अभी भी हर भारतीय के जहन में बना हुआ है। देश में माहौल की गर्माहट को  देखते हुए पीएम मोदी की ओर से स्थिति स्पष्ट करना जरूरी था। इसी का नतीजा लेह दौरा हैं।  यानी देशवासियों को भी लगे की मोदी अभी सोए हुए नहीं हैं। दूसरी और चालबाज चीन को साफ संदेश जाए कि भारत किसी भी हाल में नरम नहीं है। यानी चीन को कड़ा संदेश लेह दौरे से गया है। 

वही देशवासियों में उत्साह का संचार हुआ है। जवानों को संबल मिला है, क्योंकि पीएम मोदी खुद गलवान घाटी में घायल हुए जवानों से मिले, उनकी कुशलक्षेम जानी। 
- अणदाराम बिश्नोई

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

मोदी द्वारा हौसला अफजाई, Corona से अब रोशनी द्वारा 'लड़ाई'

इस हफ्ते के रविवार रात 9 बजे, Corona महामारी के कमांडोज का आभार वक्त करने का नया तरीका निकाला गया है। दीपक, टॉर्च जलाकर या रोशनी करके 9 मिनट तक आभार वक्त करना हैं। पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन में कहा कि, देशवासियों में जीत का उत्साह होना बेहद जरूरी है। इसी उत्साह के संचार के लिए मोदी ने यह नया ऐलान किया हैं।

Covid-19, pm modi

कहते हैं, "पंखों से कुछ नहीं होता, उड़ान तो हौसलों से होती है।" यही हौसला और उत्साह देशवासियों में अब Corona से लड़ने के लिए जरूरी हैं। आप को याद होगा, पीएम मोदी के कहने पर 22 मार्च को जनता कर्फ्यू किया गया। उस दिन देशवासियों में गजब का जोश देखने को मिला।

22 मार्च की शाम को किसी ने ताली बजाई, तो किसी ने थाली। सोशल मीडिया पर कई ऐसे भी वीडियो सामने आए, जिसमे लोग अजीब हरकते करते नजर आए। किसी ने पूरी थाली की ही 'बजा' दी। तो कहीं बारात के रूप भीड़ सड़कों पर दौड़ पड़ी। यह हरकते सभ्य समाज के लिए कतई ठीक नहीं है। उम्मीद करते हैं इस बार देशवासी कोई ऐसी हरकत नहीं करेंगे।

क्योंकि पीएम मोदी इस बार संबोधन में खुद हरकतों को लेकर अलर्ट दिखे। पीएम ने कहा कि, दीपक, टॉर्च जलाने या कोई रोशनी करने के दौरान सोशल डिस्टेंस-इंग का पूरा ध्यान रखना हैं। यानी भीड़ के रूप खड़ा नहीं होना हैं।

अफवाहों का बाजार गर्म, ऐसे नहीं भागेगा Corona

मुझे याद है, जनता कर्फ्यू के दिन मेरे गांव से मुझे कई फोन आए। किसी ने बताया कि मोदीजी, बीमारी को दूर करने के लिए यह सब कर रहे हैं। इससे Corona पर असर होगा। यानी ज्यादातर गांव के लोग जनता कर्फ्यू में थाली बजाने के आयोजन के मकसद को सही ढ़ंग से समझ नहीं पाए।

इसी का नतीजा भी यही हुआ कि कई लोग आधे घंटे तक थाली पीटते रहे। तो किसी मोहल्लेवासियों ने Corona की बारात ही निकाल दी। भीड़ के रूप थाली बजाते हुए लोग सड़कों पर दौड़ पड़े थे।

जबकि ऐसा होना नहीं चाहिए था। क्योंकि लोगों का भीड़ के तौर पर एकत्रित होने से Corona संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया था।

तीसरे स्टेज पर पहुंचने की आशंका

भारत में Corona के तीसरे स्टेज पर पहुंचने का खतरा और बढ़ गया है। इसकी बड़ी वजह है, तबलिकी जमात के लोगों का देश के कई हिस्सों में जाना और संक्रमण फैलाना। इसी आशंका के चलते, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद शुक्रवार को नई गाइडलाइन जारी करेगा। बड़े हॉटस्पॉट पर सैंपल लेकर जांच की जा सकती हैं।

आपको बता दे कि भारत में शुक्रवार सुबह तक Corona संक्रमितों की संख्या 2507 हो गई है। साथ ही अलग अलग राज्यों में देश में मौतों का आंकड़ा कुल 76 पहुंच गया है।

वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में 20 मौजूदा और 22 संभावित ऐसी जगहों की पहचान की है, जहां पर संक्रमण कम्युनिटी में फैलने का खतरा हैं। हालांकि, अभी तक देश में कम्युनिटी ट्रांसमिशन की पुष्टि नहीं हुई है।

समझदारी दिखाएं, घर में रहे

समझदारी यही है कि हम सब घर में रहे। Corona से बचने का यही एक इलाज हैं। इसी के साथ जब घर से बाहर निकलो, तो सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखे। यानी दो व्यक्तियों के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी रखनी चाहिए।

- अणदाराम बिश्नोई


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बुधवार, 25 मार्च 2020

"21 दिन अगर गंभीरता से नहीं लिए, तो भारत 21 साल पीछे चला जाएगा"

21 दिन यानी 14 अप्रैल तक पूरा भारत लॉकडॉउन हैं। पीएम मोदी ने 24 मार्च की रात 8 बजे टीवी पर देशवासियों  को संबोधित किया। पीएम ने कहा, आज रात 12 बजे से पूरे देश में lockdown है। lockdown को कर्फ्यू की तरह लेना हैं।


Corona,
पीएम मोदी ने कहा कि Corona महामारी की रूप ले चुका है। इसे हराने के लिए lockdown को गंभीरता से लेना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया तो फिर देश में हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। देश 21 साल पीछे चला जाएगा।
Lockdown को लेकर घबराना नहीं है। बस एक ही काम करना हैं। सिर्फ घर में रहना है। जरूरी सेवाएं चालू रहेगी। 
क्या बंद रहेगा और क्या चालू रहेगा। एक बार नजर डाल लेते हैं।


ये सेवाएं बंद रहेंगी 
किसी भी सार्वजनिक परिवहन सेवा को अनुमति नहीं होगी। इसमें निजी बसें, टैक्सी, ऑटो रिक्शा, रिक्शा, ई-रिक्शा सब बंद रहेंगे।
दिल्ली में डीटीसी की 25 प्रतिशत बसें चलेंगी।

सभी दुकानें, बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, फैक्ट्री, वर्कशॉप, ऑफिस, गोदाम, साप्ताहिक बाजार ये सब बंद रहेंगे।

इंटरस्टेट बसें, ट्रेन और मेट्रो सेवाएं निलंबित रहेंगी। सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द रहेंगी।

किसी तरह का निर्माण कार्य फिलहाल बंद रहेगा। सभी तरह के धार्मिक स्थान बंद रहेंगे।

ये सुविधाएं रहेंगी चालू 
दूध, सब्जी और दवा की दुकानें लॉकडाउन के दौरान खुले रहेंगे।

अस्पताल और क्लीनिक भी इस दौरान खुले रहेंगे।

इसके अलावा राशन की दुकानें भी खुली रहेंगी।

किसी बेहद जरूरी काम के लिए भी प्रशासन की ओर से छूट मिल सकती है।

बैंकों के कैश से जुड़ी सुविधाएं जारी रहेंगी। टेलिकॉम, इंटरनेट और डाक सेवा जारी रहेंगी।

सरकार ने पेट्रोल पंपों और एटीएम को आवश्यक श्रेणी में रखा है, इसलिए जरूरत के हिसाब से इन्हें खोला जा सकता है।

किन्हें मिलेगी छूट
पुलिस का काम जारी रहेगा। साथ ही कानून-व्यवस्था को लागू कराने वाले विभाग भी काम करेंगे।

स्वास्थ्यकर्मियों और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों का काम भी जारी रहेगा।

जेल विभाग और बिजली व पानी के दफ्तरों में भी काम जारी रहेगा।

नगर निगम के साफ सफाई या कूड़ा उठाने जैसे काम भी चलते रहेंगे। इसके अलावा जेल विभाग के काम भी चलते रहेंगे।

मीडियाकर्मियों को भी इस दौरान आने जाने की छूट होगी।

क्या निजी वाहन चला सकेंगे 
अगर बहुत जरूरी हो तो लॉकडाउन में भी निजी वाहनों का प्रयोग किया जा सकता है।

हालांकि बिना वजह बाहर घूमने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।

आपात व्यवस्था में एंबुलेंस को भी बुला सकते हैं।

बिना मतलब घूमने पर पाबंदी
लॉकडाउन का फैसला इसलिए लिया गया है ताकि लोग एक-दूसरे के संपर्क में न आएं।

इसलिए जरूरी नहीं होने पर घर से बाहर न निकलें।

क्या शादी-विवाह के कार्यक्रम होंगे 
संक्रमण फैलने के डर से किसी भी कार्यक्रम के लिए लोगों के जुटने पर पाबंदी रहेगी।

बहुत जरूरी होने पर आपको प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।

क्या निजी कर्मचारियों को काम पर जाना होगा

लॉकडाउन में सरकारी हो या निजी कंपनी सभी बंद रहेंगी। सिर्फ जरूरी विभाग के कार्यालय खुले रहेंगे।

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रविवार, 22 मार्च 2020

कोरोना को ऐसे समझिए, इससे आसान कहीं नहीं मिलेगा, ज़रूर पढ़िेए

तेज़ रफ्तार से चल रही दुनिया अचानक से थम सी गई है, दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है. लोग डरे हुए हैं सहमे हुए हैं हर कोई सोच रहा है। कोरोना का यह खौफ़ आखिर कब तक दिलों को दहलाता रहेगा. दुनिया के बड़े-बड़े देशों में लोग अपने घरों में ही कैद हो गए हैं. अंतराष्ट्रीय उड़ानें रद हो रही हैं, सरकारें परेशान हैं, कोई इलाज मिलता नहीं दिख रहा है, दिनों-दिन यह वायरस पूरी दुनिया में अपना पैर पसारता दिख रहा है। अब तक लगभग 170 देशों में कोरोना वायरस ने कोहराम बरपा कर दिया है। 11 हज़ार से अधिक लोगों की जान तक ले बैठा है यह वायरस। लेकिन अभी तक किसी को भी इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि यह कब खत्म होगा और इसपर कंट्रोल कब तक पाया जा सकेगा। यह वायरस अभी और कितना दहशत फैलाएगा इसके बारे में कुछ भी ठीक-ठाक नहीं कहा जा सकता है।

कोरोना

आप बेहतर जानते हैं कि कोरोना वायरस ने भारत में भी अपना कहर दिखाना शुरु कर दिया है। लेकिन भारत क्या सच में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए तैयार है। इसपर चर्चा ज़रुर होनी चाहिए. हम यहाँ भारत की कोरोना वायरस से जुड़ी हर तैयारियों की बात करेंगे, क्या खामियां हैं और क्या खूबियां हैं। इसका फैसला आप खुद करिएगा......

भारत में कुल 747 जिले हैं ये हैरत की बात नहीं है, बल्कि हैरत की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 52 शहरों में ही टेस्ट सेंटर है , जहाँ कोरोना वायरस की जाँच की जा सकती है, ज़रा ठहरिये और सोचिए क्या हम सिर्फ 52 लैबों के साथ इस खतरनाक वायरस से लड़ सकते हैं...... बाज़ारों से मास्क और सेनेटाइज़र कैसे कम हो गए और कैसे उनका गोरखधंधा होने लगा। यह तो सभी ने देख लिया। मगर क्या यह मास्क ही हमें इस वायरस से बचा ले जाने के लिए काफी है। यह भी तो एक सवाल ही है.

भारत सरकार ने इतनी तेज़ी के साथ लोगों को जागरुक किया ये सराहनीय है। लेकिन आज जब मैं यह रिपोर्ट तैयार कर रहा हूँ तब भारत में 300+ कोरोना वायरस के पाज़िटिव मरीज़ हैं। ये भी सरकार की ही लापरवाही है। भारत सरकार ने जितनी तेज़ी के साथ अब कदम उठाए हैं वह कदम बहुत पहले उठाने की ज़रुरत थी. आँकड़ों के अनुसार भारत में अभी तक जितने भी मरीज़ सामने आए हैं। वह हाल ही में विदेश की यात्रा करके भारत में आए हैं। ऐसे में अगर शुरु में ही भारत सरकार ने एहतियात बरत लिया होता और हर विदेश से आने वाले लोगों की सख्ती से जाँच की जाती तो शायद यह दुर्दशा नहीं होती.

कोरोना वायरस का टेस्ट कौन करा सकता है इसके लिए भी बाकायदा एक एडवाइजरी भारत सरकार की ओर से जारी की गई है। तो कौन -कौन कोरोना वायरस की जाँच करा सकता है यह भी आप जान लीजिए.

1. वह व्यक्ति जो वायरस से ग्रसित देश (चीन, इटली, ईरान, जापान आदि) की यात्रा करके हाल ही में भारत आया हो.
2. वह व्यक्ति जिन्हें बुखार के साथ गले में खराश हो और सूखी खाँसी (बिना बलगम के) आती हो, नाक बहती हो और साथ ही छींक आती हो.
3. वह व्यक्ति जो कोरोना पाजिटिव मरीजों के संपर्क में रहा हो.
4. निमोनिया या डायरिया का मरीज़ हो.


कैसे फैलता है कोरोना

भारत सरकार अलग-अलग माध्यम से लगातार लोगों को जागरुक कर रही है. लोगों को घरों में ही रहने के लिए कहा जा रहा है, हाथ धुलते रहने के लिए कहा जा रहा है. प्रधानमंत्री खुद जनता कर्फ्यू की अपील कर चुके हैं. लोगों को सतर्क रहने की ज़रुरत है. लोगों में कई तरह का भ्रम भी पैदा हो गया है ऐसे में यह समझना बेहद ज़रुरी है कि कोराना वायरस आखिर फैलता कैसे है.

सबसे पहली बात कोरोना वायरस हवा के ज़रिए नहीं फैलता है यह रोगी की नाक या मुँह से निकलने वाली छींटों से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचता है. रोगी के मुँह या नाक से निकली छींटें किसी भी वस्तु या सतह पर जम जाती हैं जिसका असर काफी घंटों तक उस वस्तु या उस सतह पर रहता है। दूसरा व्यक्ति इसे छू लेता है और फिर मुँह या नाक तक अपने हाथों को ले जाता है। जिससे यह वायरस का असर उस व्यक्ति पर भी देखने को मिलता है। और वह व्यक्ति भी संक्रमित हो जाता है. इसीलिए सरकार लगातार लोगों से सेनेटाइजर और साबुन से हाथ धुलने की अपील कर रही है।
अब आपको खुद ही अपना ख्याल रखना है। वस्तु कोई भी हो दरवाज़ा, कुर्सी, किताब, मोबाईल, सिक्के, नोट, लिफ्ट कुछ भी हो जो भी छुएं उसके बाद हाथों को ज़रुर धुलें, अपने लिए धुलें अपने परिवार वालों के लिए धुलें मगर धुलें ज़रुर.......

अफवाहों से बचें

कोरोना वायरस की भारत में इंट्री हुयी तो साथ-साथ अफवाहों का बाज़ार भी खूब गर्म हो गया, कोई गर्मी से कोरोना के निजात की बात कर रहा है तो कोई बर्फ से कोरोना के सही हो जाने की डीलें छोड़ रहा है. हद तो यह है कि  भारत सरकार का कोई मंत्री गो कोरोना गो के नारे लगा रहा है तो कोई जादू-टोना के ज़रिये इसके इलाज का दावा कर रहा है. आपको इनके बहकावे में नहीं आना है और सोचना है कि जब पूरा विश्व इस वायरस के सामने हाथ खड़े कर रहा है तो ऐसे में ये जाहिलाना रवैया नाकाबिले कबूल है. ये महज एक भ्रम ही है कि इसका शिकार होने वाला हर मरीज़ मर ही जाता है ऐसा नहीं है आँकड़ें कहते हैं कि इसके शिकार महज 2 से  3 फीसदी  मरीज ही हो रहे हैं. ऐसे में डरिये मत बस सतर्क रहिये. ये मत सोचिए कि जनता कर्फ्यू सिर्फ रविवार को है बाकि दिन घूम सकते हैं नहीं ऐसा हरगिज़ नहीं करना है क्या करना है, बस ये करना है-

1. भीड़भाड़ वाली जगहों पर कतई नहीं जाना है.
2. जिससे भी मिलना है कम से कम 2 फिट की दूरी बनाए रखना है.
3. 12 साल से कम और 60 साल से अधिक आयु वर्ग वालों को घर से ही नहीं निकलने देना है उनका घर पर ही ख्याल रखना है.
4. अगर सर्दी या ज़ुखाम है या फिर खाँसी आ रही है तो मास्क का प्रयोग ज़रूर करना है और डाक्टर से सलाह लेनी है.
5. हाथों को साफ करते रहना है सेनेटाइजर नहीं है तो कोई बात नहीं साबुन का इस्तेमाल करिये मगर करिये ज़रूर.
6. अगर बहुत ज़रुरी न हो तो घर से बाहर नहीं निकलना है.
7.  किसी भी अन्य व्यक्ति का कोई सामान उपयोग में नहीं लाना है. मसलन किसी का मोबाईल वगैरह नहीं छूना है.
8. गंदगी में न तो रहना है और न ही गंदगी को फैलाना है.
9. ऐसी चीज़ों से परहेज करना है जो बिमारियों को दावत देती हैं मसलन तरल पदार्थ वगैरह क्योंकि इस वक्त आपको अस्पतालों के चक्कर बिल्कुल भी नहीं काटने चाहिए यह नुकसानदेह हो सकता है.
10. आप सत्तादल के साथ हों या विरोधी हों सरकार जो भी नियम या अपील जारी करती है तो उसका पूरी ज़िम्मेदारी के साथ पालन भी करना है.

- मशाहिद अब्बास
(यह गेस्ट पोस्ट हैं। लेखक के अपने विचार हैं। आप भी गेस्ट पोस्ट delhitv@yahoo.com पर भेज सकते हो)

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शुक्रवार, 20 मार्च 2020

22 मार्च को जनता कर्फ्यू, PM मोदी का ऐलान, घर में रहने की अपील

पीएम मोदी ने कोरोनावायरस को लेकर देश को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना से बचने का एक मात्र उपाय बचाव ही हैं। इसलिए हम सबको, अपने आप को स्वस्थ रखना हैं। घर में रहना है।

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पीएम ने कहा कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू करना है। यानी जनता का कर्फ्यू, जनता के लिए, जनता के द्वारा। सभी लोग 22 मार्च को सुबह 7 बजे से शाम 9 बजे घरों में रहे। पीएम मोदी ने सभी देश वासियों से यह अपील की हैं। हालांकि जिसको बहुत जरूरी काम है, वो घर से बाहर जा सकते हैं।

खुद बचे, औरों को भी बचाएं

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोनावायरस को हराना है। इसके लिए हमें जितना हो सके, घर में रहना है। खुद को स्वस्थ रखना हैं। खुद को स्वस्थ रखने के लिए अपने आप को घर में रखे। इससे हम खुद भी स्वस्थ रहेंगे, साथ ही औरों को भी रख पाएंगे।

साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि विशेषकर बुजुर्ग घर में रहे। जिसकी उम्र 60-65 साल या इससे ज्यादा हैं, वो घरों में ही रहे।

पत्रकारों, डॉक्टरों और पुलिस का करे धन्यवाद

पीएम मोदी ने देशवासियों से पत्रकारों, डॉक्टरों और पुलिस कर्मियों को आभार वक्त करने की बात कही हैं। पीएम ने कहा कि कोरोनावायरस से जूझ रहे लोगों की मदद करने वालों को हमें आभार जताना हैं।

पीएम ने कहा कि भारत सेवा भाव वाला देश हैं। अब हमें संयम के साथ श्रद्धा भाव प्रकट करना है।

साथ ही पीएम ने कहा कि 22 मार्च को शाम 5 बजे बालकनी में खड़े होकर ताली बजाकर मदद करने वालों का आभार वक्त करना हैं।

9 हजार से ज्यादा मौत

चीन के वुहान से फैले कोरोनावायरस का कहर बढ़ता ही जा रहा है। अब इसने पूरी दुनिया को चपेट में ले लिया है। दुनियाभर में 2.25 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 9 हजार से ज्यादा मौत हो चुकी है। वहीं 85 हजार लोग इस बीमारी से सही भी हो चुके हैं।

चीन, इटली, ईरान, स्पेन और जर्मनी ऐसे देश हैं, जहां सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं.

- अणदाराम बिश्नोई


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शुक्रवार, 13 मार्च 2020

सिंधिया बीजेपी में, मजबूरी या मजबूती ?



बीजेपी, सिंधिया, एमपी
ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल हुए

याद कीजिए वो दिन, जब तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर पर बायो को बदला था। तब मध्यप्रदेश की सिसासत में हलचल ला दी थी। ... और 10 मार्च का दिन, जिसने मध्यप्रदेश की सरकार को बदलने के वक्त की दहलीज पर ला दिया। 11 मार्च 2020 को सिंधिया द्वारा बीजेपी में शामिल होने से मध्यप्रदेश की सियासत का रायता, भोपाल से वाया जयपुर होते हुये दिल्ली तक फैल गया

 जहन में बड़ा सवाल है कि, आखिर सिंधिया ने कांग्रेस क्यों छोड़ी। हालांकि सिंधिया ने पत्रकार वार्ता में कमलनाथ सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। सिंधिया ने कहा कि अब कांग्रेस में रहकर देशसेवा करना संभव नहीं है। प्रदेश सरकार जिन विजनों के साथ आई थी, उस पर चल नहीं पा रही हैं।

दूसरी तरफ बीजेपी में शामिल होने पर सिंधिया को बीजेपी का राज्यसभा प्रत्याशी बनाया गया है। सूत्रों से खबर आ रही हैं कि केंद्रीय मंत्री पद देने की शर्त पर कांग्रेस छोड़ी है।

'अच्छा होता, पहले चले जाते'

राजस्थान सीएम और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने सिंधिया का बीजेपी शामिल होने को अवसरवादी बता दिया। सीएम गहलोत ने कहा कि अच्छा होता, सरकार बनाने से पहले ही सिंधिया बीजेपी में चले जाते।

वहीं गहलोत ने लोकतंत्र की हत्या की बात कही है। गहलोत ने मोदी सरकार की फौज को निशाने पर लेते हुए कहा कि पूरा मुल्क देख रहा है, किस तरह से बीजेपी लोकतंत्र की हत्या कर रही हैं।

बीजेपी को दो फायदे

सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफा देने से बीजेपी के पास बहुमत का आंकड़ा हो जाता है, अगर वो बीजेपी में शामिल होते हैं। जाहिर सी बात है, ये विधायक बीजेपी में शामिल होंगे। क्योंकि सिंधिया समर्थक हैं। ऐसे में बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिल रहा है।

दूसरा, मध्यप्रदेश से राज्य सभा की भी सीट बीजेपी के झोले में जाती दिख रही है।

हाशिए के शिकार हो रहे थे सिंधिया !

भले ही सिंधिया कांग्रेस में करीब 20 सालों से युवा शक्ति के तौर पर काम कर रहे थे। लेकिन सिंधिया को कांग्रेस में तवज्जों कम मिलनी की बात सामने आने लगी। कमलनाथ और सिंधिया के बीच सरकार में रहते कई बार अनबन सार्वजनिक रूप से भी देखने को मिली। सिंधिया ने अपनी ही सरकार पर कई दफा निशाने साधे।

सिंधिया ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा था कि कांग्रेस में रहकर देश सेवा संभव नहीं हैं। अब कांग्रेस में माहौल अलग हैं।  कहा जा सकता है, एक तरह से सिंधिया कांग्रेस में धीरे धीरे हाशिए पर धकेले जा रहे थे।

मध्यप्रदेश के कई राजनीतक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि सिंधिया का गुना से हार जाना भी एक फैक्टर हैं। जिसके चलते उनका अपने ही क्षेत्र में प्रभाव कम होता जा रहा था। सिंधिया का चंबल, गुना क्षेत्र में एक अच्छा प्रभाव माना जाता हैं। लेकिन जिस तरह का प्रभाव माना जा रहा था, वैसा अब नहीं रहा।

तो सिंधिया ने लिया, सही वक्त पर सही फैसला ?

कहा जाता है इंसान को सही वक्त पर, सही दिशा में, सही फैसला लेना चाहिए; अगर कामयाब होना है तो। यह वक्तव्य कहीं ना कहीं सिंधिया के फैसले पर सटीक बैठता नजर आ रहा है। अगर राजनीतिक पंडितों की राय का औसत माने तो।

- अणदाराम बिश्नोई


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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

फोटो स्टोरी : ट्रंप के भारत दौरे को सिर्फ 25 तस्वीरों से समझिए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24-25 फरवरी को भारत दौरे पर हैं। सोमवार को अहमदाबाद में ट्रंप ने नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी समेत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का परिवार भी मौजूद रहा।

अगर आप ने दिनभर टीवी पर कार्यक्रम नहीं देखा हैं, तो कोई बात नहीं। क्योंकि आपको DelhiTV.in पर पढ़ने को मिल रही है सिर्फ 25 तस्वीरों में पूरी कहानी।

पहली तस्वीर : जैसे ही विमान से अहमदाबाद एयरपोर्ट पर ट्रंप बाहर आए, तो पीएम मोदी ने गले लगकर गर्म जोशी से स्वागत किया। पास में खड़ी हैं ट्रंप की पत्नी मलानिया

Namste trump

दूसरी तस्वीर : ट्रंप का विमान सोमवार यानी 24 फरवरी को करीब 11:40 AM पर पहुंचा। तस्वीर में ट्रंप और मोदी हैं, साथ ही दोनों के पीछे पीछे चल रही हैं अमरीका की फर्स्ट लेडी यानी ट्रंप की पत्नी मेलानीया।

तीसरी तस्वीर : अहमदाबाद एयरपोर्ट पर ट्रंप का भारतीय तरीके से स्वागत हुआ। इस दौरान गुजराती ट्रडिशनल वेशभूषा में कलाकार नजर आए।

चौथी तस्वीर : एयरपोर्ट से निकलने के बाद ट्रंप ने रोड शो किया। जो करीब 22 किलोमीटर था। यह तस्वीर ट्रंप के रोड शो के दौरान की हैं। जिसमे आप देख सकते हैं, कार पर एक तरफ भारत का झंडा हैं, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका का।

पांचवीं तस्वीर : महात्मा गांधी की स्थली साबरमती आश्रम ट्रंप पहुंचे। इस दौरान पीएम मोदी और पत्नी मेलानीया मौजूद रहीं। ट्रंप ने वाकई चरखे पर हाथ आजमाया, तस्वीर में आप देख सकते हैं कि ट्रंप चरखा चला रहे हैं।

छठी तस्वीर : साबरमती आश्रम के बाद ट्रंप मोटेरा स्टेडियम पहुंचे। नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान गुजरात सीएम रूपानी, मंत्री अमित शाह और राज्यपाल देवव्रत ने स्वागत किया।

सातवीं तस्वीर : ट्रंप ने संबोधन में कहा कि 22 हजार मील चलकर अमेरिका का भारत के प्रति प्यार जताने आए हैं। भारत पर हमें गर्व है। पीएम मोदी के नेतृत्व में देश अच्छा काम कर रहा है।

आठवीं तस्वीर : मोटेरा स्टेडियम में पीएम मोदी, ट्रंप और मेलानीया लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए।

नौवीं तस्वीर : खच्चा खच भरे स्टेडियम में लाखों लोग। पीएम मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाथ उठाकर, अमरीका भारत की दोस्ती की मिसाल पेश की।

दसवीं तस्वीर : दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम, मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम अहमदाबाद। नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम के दौरान विहंगम नज़ारा।

ग्यारहवीं तस्वीर : नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम। मोटेरा स्टेडियम में मोदी और ट्रंप गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए।

बारहवीं तस्वीर : ट्रंप के संबोधन के दौरान पावरफुल तस्वीर। ट्रंप संबोधित कर रहे हैं। मेलनीय और पीएम मोदी मंच पर बैठे हैं।

तेरहवीं तस्वीर : ट्रंप और मोदी कई बार गले मिले। स्टेडियम की तस्वीर

चौदहवीं तस्वीर : वहीं पीएम मोदी ने भी नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। तस्वीर में लोगों को संबोधित करते पीएम मोदी।

पंद्रहवीं तस्वीर : अहमदाबाद से ट्रंप परिवार आगरा पहुंचे। जहां यूपी सीएम योगी ने स्वागत किया। योगी ने ट्रंप को ताजमहल की बड़े फ्रेम में एक तस्वीर भेंट की।

सोलहवीं तस्वीर : मोहब्बत की निशानी ताजमहल का दीदार। ट्रंप और पत्नी मेलानिया दोनों हाथ में हाथ डालकर ताज को निहारते हुए।

सत्रहवीं तस्वीर : फोटो सेशन के दौरान ट्रंप और मेलानिया की तस्वीर। पीछे ताजमहल हैं। आपको बता दे की ट्रंप ने करीब डेढ़ घंटे ताजमहल के लोन में वॉक किया।

अठाहरवीं तस्वीर : ताजमहल के साथ क्लॉज फोटो। ट्रंप और मेलानिया।

उन्नीसवीं तस्वीर : वहीं आपको बता ते चले कि आगरा की विजिटिंग बुक में ट्रंप ने संदेश भी लिखा। साथ में खड़े मोदी और मेलानिया।

बीसवीं तस्वीर : ताजमहल विजिटिंग बुक में संदेश की फोटो। ट्रंप ने लिखा कि ताजमहल भारत की अद्भुत धरोहर हैं। धन्यवाद भारत...

इक्कीसवीं तस्वीर : साथ में आपको यह भी बताते चले कि साबरमती आश्रम की विजिटिंग बुक में भी ट्रंप ने अनूठा संदेश लिखा। यह उसकी फोटो हैं। जिसमे ट्रंप ने लिखा - मोदी मेरा प्रिय दोस्त हैं।

बाईसवीं तस्वीर : आपको बता दे कि आगरा विजिट के दौरान ट्रंप परिवार भी था। ट्रंप की बेटी इवानका ट्रंप ने अपने पति ज़रेड के साथ फोटो सेशन कराया।

तेइसवीं तस्वीर : इवांका की फोटो पति के साथ। जिसमे दोनों मुस्करा रहे हैं। पीछे ताजमहल दिखाई दे रहा है।

चौबीसवीं तस्वीर : इवाणका ट्रंप की अकेली की फोटो। अद्भुत नजारा। 

पच्चीसवीं तस्वीर : जाते जाते आपको दिखाते हैं भारत और  अमरीका की दोस्ती की मिसाल पेश करती फोटो। जो कह रही हैं। अमेरिका से वाकई मेरा कोई दोस्त आया हैं... और उधर से... मोदी मेरा प्रिय दोस्त हैं।

- अणदाराम बिश्नोई

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रविवार, 23 फ़रवरी 2020

ट्रंप ने बाहुबली थीम पर शेयर किया वीडियो, लिखा - भारत वासियों से मिलने के लिए उत्साहित

अमेरिकी राष्ट्रपति भारत दौर पर हैं। 24-25 फरवरी तक रुकेंगे। साथ में पत्नी मेलानीय, बेटी इवांका, बेटा जूनियर ट्रंप, और दामाद भी रहेंगे। वहीं दौर को तैयारी पूरी तरह से तैयार हैं। इसी माहौल के बीच ट्रंप ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर कर सबका दिल जीत लिया है।  पहले आप यह वीडियो देखिए -  फिर इसके पीछे की कहानी बताते हैं।

दरअसल, यह वीडियो ट्विटर पर मीम आर्टिस्ट ने ट्वीट किया है। इसको फिर ट्रंप ने रीट्वीट किया, और लिखा कि मैं भारत वासियों से मिलने के लिए उत्साहित हूं। आपको बता दे की वीडियो बनाने वाले मेमेलजी के प्रोफेसर है।

जानकारी के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौर पर हैं। वो अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 25 फरवरी को आगरा आएंगे। पत्नी मेलेनिया के साथ ताजमहल का दीदार करेंगे। वहीं आपको बताते चले कि ट्रंप के साथ बेटे, बेटी और दामाद भी हैं।

जयपुर एयरपोर्ट रखा है स्टैंडबाई मोड पर

ट्रंप सीधे अहमदाबाद जाएंगे। लेकिन मौसम खराब होने की वजह हो सकता है ट्रंप के विमान को जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड कराया जाए। इसी मद्देनजर रविवार को अमेरिकी खुफिया एजेंसी के कई अधिकारी जयपुर पहुंचे। अमेरिक अधिकारियों ने जयपुर एयरपोर्ट का सुरक्षा की तौर पर अमेरिकी मानकों पर जायजा लिया।

- अणदाराम बिश्नोई

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मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

पटरी पर लौट आया प्याज !

200 रुपए से प्याज अब सस्ता हो गया है। जिसका असर रेहड़ी से लेकर होटल तक दिखने लगा है। याद कीजिए हाल ही के वो दिन, जब प्याज की जगह सलाद में खीरा और मूली परोसी गई। वाकई बहुत कठिन दौर रहा। खाने का स्वाद ही बिगाड़ दिया। खैर , अब स्थिति में सुधार हो रहा है। विदेश से प्याज का स्टॉक आने से राहत मिली है। प्याज की कीमत 50 से 60 रुपए तक देखने को मिल रही हैं।

प्याज का भाव, onion Price rate in India

प्याज क्यों हुआ सस्ता ? 

जब सितम्बर-नवंबर में प्याज की कीमतें आसमान छूने लगी, तो केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए विदेशों से प्याज मंगाया। जिसका अब नतीजा यह है कि प्याज का स्टॉक ज्यादा हो गया है। क्योंकि भारत में प्याज की उपज भी मंडियों में आना शुरू हो गई हैं। जिसके चलते कृषि उपज मंडी में औसत थोक रेट करीब 20 से 25 रुपए प्रति किलो हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, आने वाले वक्त में प्याज की कीमतों में और गिरावट होगी।

खाने का बढ़ा जायका, तो किसानों की बढ़ी चिंता

प्याज की कीमतों में गिरावट एक तरफ मध्यम वर्ग के लोगों के लिए राहत हैं, तो वहीं किसानों के माथे पर चिंता की नई लकीरें खींच दी है। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार फसल की पैदावार में अच्छी आय होगी। लेकिन उपज मंडियों में घटते प्याज के दाम उल्टा संकेत दे रहे हैं। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में रोज मंडियों में करीब 500 बोरी प्याज की आवक हो रही हैं। प्याज की आवक का दौर लगातार जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, मंडियों में नवंबर में 80 से 90 रुपए तक प्रति किलो बिक रहा था। वहीं अब प्याज फरवरी में 20 से 25 रुपए प्रति किलो थोक में बिक रहा है।

 प्याज सस्ता होने से दूसरी तरफ शहरों में लोगों को राहत मिली है। जो प्याज पहले 200 रुपए में मिल रहा था, वही अब 50 रुपए प्रति किलो बाज़ार में मिल रहा है। फाइव स्टार होटल से लेकर रेहड़ी में मिलने वाले खाने तक का जायका बढ़ गया है। मूली की जगह सलाद में अब प्याज मिलने लगा है। हो सकता है, आपको वेटर्स से थोड़ा निवेदन करना पड़ सकता है।

आयातित बड़ी खेप का अब क्या होगा ?

आपको बता दे कि विदेशों से बड़ी संख्या में मंगाई गई प्याज आधी से ज्यादा धरी की धरी रह गई है। बंदरगाहों पर सड़ रही हैं। वजह है - खेप ज्यादा होना, देशी प्याज से स्वाद कम होना और देशी प्याज की आवक। जिसके कारण लोग पसन्द नहीं कर रहे हैं।  ऐसे में राज्य सरकारें बड़ी संख्या में आयातित प्याज की खेप को लेने की मूड में बिल्कुल नहीं है। प्याज भले ही एक बार पटरी पर लौट आया है। लेकिन अब सवाल , आखिर विदेशी प्याज की बड़ी खेप का क्या होगा ?

- अणदाराम बिश्नोई


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बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

अदनान सामी: अंतरराष्ट्रीय संगीतकार के रूप में प्रसिद्ध होने से लेकर मोदी के हिमायती बनने तक का सफर

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पद्म पुरस्कारों की घोषणा की।इन नामों में से एक अदनान सामी पर बहस छिड़ी है।
सामी का जन्म 1971 में हुआ। अदनान सामी के पिता पाकिस्तान वायु सेना में पायलट रहे है और बाद ने 15 देशों में पाकिस्तान के राजदूत रहे। अदनान सामी पाकिस्तान के नागरिक रहे है और साल 2015 में जब पाकिस्तान ने उनका वीजा नवीनीकरण का आवेदन खारिज किया तो उन्होंने भारतीय नागरिकता हासिल की।

Adnan swami, Adanan Swami
PC : Adanan Swami Insta.
10 साल की उम्र में उन्होंने लंदन में आर डी बर्मन कॉन्सर्ट में हिस्सा लिया। उन्हें क्या पता था कि इसके बाद उनकी जिंदगी एक अलग ही करवट लेने वाली थी। वहां उनकी मुलाकात आशा भोंसले से हुई और इसके बाद उन्होंने संगीत को अपना सब कुछ दे दिया।


अदनान सामी ने 15 साल की उम्र में अपना पहला गाना गाया जो साल 1986 में मध्य पूर्व का सबसे हिट गाना बना। उसके एक साल बाद उन्होंने यूनिसेफ के लिए गाना लिखा। ये गीत इथोपिया के लिए समर्पित था जो सदी के सबसे भयंकर सूखे से ग्रसित था। इसके लिए उन्हें विशेष पुरस्कार मिला। अमेरिका की एक सम्मानित मैग्जीन ने उनको नब्बे के दशक की कीबोर्ड की खोज कहा।

 एक समय वो भी आया जब उनका वजन 230 किलो तक पहुंच गया था लेकिन उन्होंने 16 महीने में उन्होंने करीब 170 किलो वजन कम किया था। तब भी उनकी बहुत चर्चा हुई थी।
हाल ही में उन्होंने सलमान खान अभिनीत 'बजरंगी भाईजान' में कव्वाली भी गाई। ' भर दो झोली मेरी ' गाने को पूरे विश्व में सराहा गया था। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैं आपको ' उड़ी उड़ी उड़ी ' सुनने को कहूंगा।

विवाद क्यों?

अदनान सामी ने संगीत के क्षेत्र में बहुत सम्मान कमाया। तो ऐसा क्यों हो रहा की उनको पद्म श्री देने पर विवाद हो रहा है? वहीं दूसरी और कुछ लोग इसे भारत की ' धर्मनिर्पेक्षता ' का उदाहरण बता रहें है।

आइए देखते है कैसे रहे अदनान सामी के भारतीय नागरिक के रूप में 5 साल।

सबसे पहले हम जानते है ट्विटर पर अदनान सामी का प्रदर्शन।

' प्रदर्शन ' जी हां। आज सोशल मीडिया के जमाने में आधी राजनीति ट्विटर पर ही खेली जाती हैं। नेताओं को चाहे सूचना देनी हो या फिर किसी दूसरे नेता पर निशाना साधना हो, युवाओं को धर्म की राजनीति में बांटकर अपना वोट बैंक फैलाना हो या फिर किसी महिला नेता या अभिनेत्री को ट्रोल करना हो, ट्विटर सबके लिए आसान साधन है। 

जैसे ही अदनान सामी की आईडी @AdnanSamiLive खोलते है, उनकी भारतीय झंडे के साथ लगी तस्वीर आपका ध्यान नहीं भी खींचे तो आप उनका परिचय पढ़िए। 
 ' गर्व से भारतीय ' से उनका परिचय खत्म होता है। इसमें कोई गलत बात नहीं है कि उन्हें भारतीय होने पर गर्व है। मैंने खुद अपना परिचय कुछ इसी अंदाज में लिखा है। लेकिन उनके ट्वीट्स देखकर ऐसा लगेगा की ये किसी संगीतकार के नहीं बल्कि बीजेपी के किसी नेता के बयान हैं।
चाहें उनका धारा 370 को हटाने पर समर्थन देना, नागरिकता कानून को सही ठहराने पर उनके बयान या फिर प्रधानमंत्री मोदी के हर बयान का समर्थन करना, वो पाकिस्तानी आलोचकों के निशाने पर रहते है।
पाकिस्तानी ट्रोल उन्हें ' मेजर अदनान सामी ' कहते है और कहते हैं कि वो एक खुफिया मिशन पर है। लेकिन अदनान सामी भी उन ट्रोल पर जबरदस्त तरीके से पलटवार करते है।

बहुत सारे मौकों पर उन्होंने जेपी नड्डा के नेतृत्व वाली पार्टी को खुले आम सलाह दी और बिन मांगी शुभेच्छा भी साथ में दे डाली।

पिछले साल आम चुनावों से पहले उन्होंने ट्वीट किया जिसमें उन्होंने मोदी सरकार को यूपी में महागठबंधन से चेताया था और दूसरी बार जीतने के लिए जिताऊ उम्मीदवार चुनने की सलाह दी।

2013 में अदनान सामी पर टैक्स ना चुकाने का आरोप बीजेपी लगा चुकी है लेकिन भारतीय नागरिक बनने के बाद उन्होंने केवल प्रधानमंत्री का महिमामंडन किया है।

क्या सही मायनों में वे पद्म श्री के हकदार है?
यदि इसका उत्तर सटीक दिया जाए तो होगा, हां ।
अदनान सामी संगीत में बहुत योगदान दिया है। लेकिन ये बात भी कुछ हद तक सही है कि उन्होंने सभी उपलब्धियां पाकिस्तानी नागरिक होते हुए हासिल की। और संगीत में राहत फतेह अली खान शाहब ने भी भारत में काम करते हुए शोहरत और सम्मान पाया। इस तर्क से वो भी पद्म पुरस्कार के हकदार थे।

लेकिन पद्म श्री पुरस्कार मिलने में उनके राजनैतिक विचारों का भी योगदान है। यदि वो राजनैतिक रूप से तटस्थ होते तो शायद बीजेपी के नेतृत्व वाली वाली सरकार उन्हें पुरस्कार देने में हिचकिचाती।

ये एक कटु सत्य है कि भारत में पुरस्कार मिलने में हमेशा ही राजनैतिक हस्तक्षेप होता रहा है। ये अतीत में कांग्रेस नीत सरकार में भी होता था और अभी मोदी सरकार में भी हो रहा है।

पिछले साल ' उरी: सर्जिकल स्ट्राइक ' को नेशनल अवार्ड मिला। फिल्म नेशनल अवार्ड के लायक थी लेकिन ' अंधाधुन ' सही मायने में श्रेष्ठ फिल्म थी। आदित्य धर निर्देशित फिल्म को  राष्ट्रवाद का सहारा मिला और इसी कारण इसे ' अंधाधुन ' के बराबर दर्जा मिला।

लेकिन आज की राजनीति मुद्दे और नीति आधारित ना होकर इस बात पर आधारित है कि कौन बहुसंख्यकवाद के अगुवा के रूप में सामने आता है।

आज राजनीति चेहरे कि लड़ाई हो गई है। जब जब भारत को कोई सशक्त नेता मिला है, चाहे वो इंदिरा गांधी हो या नरेंद्र मोदी, विपक्ष को हमेशा चेहरे के लिए मशक्कत करनी पड़ी है। ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि कभी परिवारवाद आड़े आता है तो कभी जातिवाद। ये ही हमारी देश के नागरिक होते हुए विफलता है कि हम कभी इन मुद्दों से अलग हो ही नहीं पाए। हमारे देश ने आर्थिक और सामरिक क्षेत्र में काफी सफलता हासिल की है लेकिन सामाजिक स्तर पर हम उतना विकास नहीं कर पाए जितना  हमारे देश के नीति निर्माताओं ने आजादी के समय आस लगाई होगी।
 - हिमांशु यादव

(नोट : यह लेखक के अपने विचार हैं। यह आलेख एक गेस्ट पोस्ट हैं। DelhiTV.in पर गेस्ट पोस्ट के लिए मेल - delhitv@yahoo.com)