बुधवार, 5 दिसंबर 2018

फोटो स्टोरी : इस चुनावी मौसम में वोट खातिर नेताजी क्या-क्या कर रहे हैं ! जाने इस रिपोर्ट में

विधानसभा चुनाव के मतदान तीन राज्यों (मिजोरम, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़) में पूर्ण होने के बाद 7 दिसम्बर को राजस्थान और तेलगांना में होेने बाकी हैं।  जैसे-जैसे मतदान तारीख नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे सारे दल, बागी, और निर्दलीय जीतने के लिए धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। लेकिन इन पांच राज्यों के चुनावी मौसम में नेताओं के प्रचार के दौरान कई अनोखें, अजीबो-गरीब तरीके देखने को मिले हैं। कहीं कोई प्रत्याशी जूता देकर बोले - वादा पूरा न करूं तो इसी से पीटना , तो कहीं घेरेलू कामों में महिलाओं के साथ हाथ बंटाए। पढ़िए दैनिक भास्कर के 'चुनाव विशेष' पेज की सहायता से तैयार की गई अणदाराम बिश्नोई की विशेष रिपोर्ट - 

Chunav Special, Election 2018,

जीत का टोटका
तेलगांना के  CM ने करवाया यज्ञ, तो इधर राजस्थान के पूर्व CM को बहन ने दिया शगुन
फोटो साभार : दैनिक भास्कर
हैदराबाद (तेलगांना) | राज्य के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव  (केसीआर) ने सत्ता वापसी के लिए दो दिन का 75 पंडितो से यज्ञ करवाया। जिसमें केसीआर की पत्नी सहित पुरा कैबिनेट भी शामिल हुआ। फिर चुनाव प्रचार की शुरूआत की गई। यह तस्वीर टीआरएस प्रमुख केसीआर के यज्ञ की हैं, जो हाल ही के दिनों में हुआ।

Photo Credit- Dainik Bhaskar
जोधपुर (राजस्थान) | तो इधर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  सरदारपुरा विधानसभा सीट से नामांकन भरने से पहले बड़ी बहन विमला से आशीर्वाद लेने गए। बहन ने जीत का आशीर्वाद देकर चुनाव लड़ने के लिए 500 रूपए का शगुन भी दिया।

गृह-कामों में बंटा हाथ
किसी ने बर्तन मांजे तो किसी ने देहरी लिपी, महिलाओं ने मना किया लेकिन नेताजी नहीं रूकें
Photo Credit- Dainik Bhaskar
इंदौर (मप्र) | यह फोटो संदीप जैन ने ली हैं। जो भास्कर में 19 नवम्बर को प्रकाशित हुई थी। जिसमें साफ दिख रहा हैं कि एक महिला बर्तन मांज रही हैं और पास ही एक टोकरी में पड़े कुछ बर्तनों मे से भगोने को लाल चोला व माला पहना हुआ व्यक्ति भी मांज रहा हैं। ध्यान रहे यह कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि  इंदौर की सांवेर सीट  से भाजपा प्रत्याशी  राजेश सोनकर हैं। जो शनिवार को वोट मांगने घरों में निकले थे। इसी बीच प्रत्याशी सामान्यत: एक घर में वोट मांगने गए, जहां पर पहले से ही महिला रसोई में बर्तन मांज रही थी। यह देखकर नेताजी ( भाजपा प्रत्याशी)  भी बर्तन मांजने बैंठ गए और वोट की अपील करने लगें। महिला ने बर्तन मांजने से मना भी किया लेकिन नेताजी चुनावी मौसम को भांपते हुए नहीं रूकें।

Photo Credit- Dainik Bhaskar
डबरा(मप्र) | दुसरी तस्वीर  डबरा मध्यप्रदेश की हैं। जिसमें भाजपा के बागी तथा वर्तमान में शिवसेना के प्रत्याशी  दिनेश खटीक महिला के साथ देहरी लिपते दिख रहे हैं। तस्वीर को ध्यान से देखें तो पता चलता हैं कि गले में माला डाले हुए नेताजी देहरी के नीचे खड़े हैं और एक हाथ से पानी का छींटा भी मार रहे हैं।  वहीं नेताजी का दुसरा हाथ देहरी पर टीका हैं। देहरी पर सफेदी से रंगोली की तरह कुछ बना हुआ दिख रहा हैं। जिसके दुसरी तरफ महिला खड़ी हैं। भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार महिला ने नेताजी को देहरी लिपने से मना भी किया। परन्तू नहीं माने और कहने लगें - मुझे नोट दीजिए तो ऐसे ही घर के सारे काम करूगां।

Photo Credit- Dainik Bhaskar
लाडपुरा | यह तस्वीर आम गृहणी की नहीं बल्कि भाजपा प्रत्याशी (लाडपुरा) और पूर्व युवरानी कल्पना देवी की हैं। वाक्या उस वक्त का हैं, जब कल्पना घर-घर जाकर जनसम्पर्क कर रही थी। युवती को चूल्हे पर रोटी बनाते देख, कल्पना ने हाथ बंटाया और खुद रोटियां सेकनें लगी। साथ ही वोट की अपील भी की।

फार्मिंग और टेलरिंग भी
नेताओं के रूप अनेक : कहीं दर्जी तो कहीं किसान
Photo Credit- Dainik Bhaskar
महबूबाद (तेलगांना) | यह तस्वीर एक दर्जी के घर की हैं। सिलाई मशीन को चला रहे दर्जी नहीं बल्कि तेलगांना की मेहबूबाद विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी जाटोत हुसैन नायक हैं। प्रचार पर निकले नायक, दर्जी का वोट लेने के लिए सिलाई करने लगें। हाल ही में भास्कर में प्रकाशित हुई खबर के अनुसार  नायक किसान का हल चलाने, नाई की दुकान पर लोगों की दाढ़ी तक बना रहे हैं।

Photo Credit- Dainik Bhaskar
चोपदंडी (तेलगांना) | यह तस्वीर भी तेलगांना राज्य से हैं, जिसमें साफ दिख रहा है कि तीन व्यक्ति एक ही रंग का (लाल) गमच्छा पहने , किसान के पास बैठें हैं। इन में से बीच में हैं, सफेद पेन्ट-शर्ट व लाल गमच्छे में टीआरएस प्रत्याशी सुके रविशंकर। जो वोट खातिर किसान के घर पर भुट्टे छिल रहे हैं। हाल हीं में भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक  वोट मांगने के दौरान रविशंकर घरों मेंं कपड़े प्रेस करना, मजदुरों के साथ ईंट उठाई और  या तक की बैंड-बाजा वालों के साथ पुंगी व ढोल भी बजाते हैं।

पैर पड़ना
राहगीर के पैर तब तक नहीं छोड़ते, जब तक वोट का आश्वासन नहीं मिलता
Photo Credit- Dainik Bhaskar
गुना (मप्र) | यह तस्वीर अमित शर्मा ने ली है, जो मध्यप्रदेश के गुना की हैं। तस्वीर में सपाक्स दल के प्रत्याशी जगदीश खटीक जीत के लिए हर राहगीर का पैर पकड़ते नजर आ रहे हैं। तब तक नहीं छोड़ते जबतक जीत का आशीर्वाद नहीं देते।

Photo Credit- Dainik Bhaskar
दौसा (राज.) | तस्वीर में सफेद चटाई पर एक व्यक्ति दंडवत नजर आ रहा हैं। जो भगवान के आगे नहीं बल्कि भरे बाजार में बीच रोड़ पर जनता के आगें हैं। इससे दुसरा पहलू यह भी झलकता हैं कि जो नेता पांच साल में कभी जनता की सुध तक लेने नहीं आए और अब किस तरह के ड्रामें कर रहे हैं। आपको बता दे कि दंडवत हुए यह शख्स भाजपा प्रत्याशी ओम प्रकाश हूडला हैं। जो लोगों से इस तरीके वोट मांग रहे हैं।

जलवा निर्दलीयों का...
कोई पीटने के लिए चप्पल दे रहा है तो किसी ने जमीन गिरवी रखी
Photo Credit- Dainik Bhaskar
कोरातला (तेलगांना) | यह तस्वीर तेलगांना के कोरातला क्षेत्र की हैं। जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार अकला हनुमंत वोटरों को चप्पल दे रहे हैं और कह रहे हैं कि जीतने के बाद वादें पुरें नहीं किए तो इसी चप्पल से पीटना।

जोधपुर (राज.) | वहीं दुसरी तस्वीर राजस्थान के औसियां विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार विशेक विश्नोई के 16 वादों की हैं। जिसमें आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि वादें पुरा न करने पर अपनी 16 बीघा जमीन जनता को सुपुर्द करने की बात कहीं गई हैं। इसके अलावा विश्नोई अपने प्रचार के तौर-तरीको को लेकर भी काफी सुर्खियों में हैं। कभी ऊंट गाड़ी पर प्रचार करते हैं तो कभी चुनाव चिह्न खटिया (चारपाई) को साथ में लेकर।

प्रचार का अंदाज अनोखा
प्रत्याशी कहीं कच्ची घोड़ी के साथ, तो कही खाट पर बैठकर कर रहे प्रचार
Photo Credit- Dainik Bhaskar
बगरू (राज.) | जयपुर की बगरू सीट से चुनाव लड़ रहे हैं भाजपा प्रत्याशी कैलाश वर्मा मतदाताओं को लुभाने की अलग-अलग तरकीब अपना रहे हैं। इस तस्वीर में रंगीला साफा बांधे वर्मा कच्ची घोड़ी के साथ प्रचार करते नजर आ रहे हैं।

Photo Credit- Dainik Bhaskar
कोटड़ा (राज.) | इस तस्वीर को शाहिद खान पठान  ने  राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्र झाड़ेल विधानसभा के छालीबोकड़ा ग्रामीण एरिया से ली हैं। जिसमें नेताजी  को कुछ समर्थक  खाट (चारपाई)  पर बैंठाकर रोड़ शो कर रहे हैं। आपको बता दे कि खाट पर विराजमान दिख रहे नेताजी  सोहनलाल परमार निर्दलीय प्रत्याशी हैं।

तो देखा आपने ! इस चुनावी मौसम में सत्ता को पाने के लिए किस तरह के तरीके अपनाए जा रहे हैं। कॉमेंट करके बताइए , आपको यह आलेख कैसा लगा ? और इसे शेयर करना बिल्कुल मत भूलिए।
✍ अणदाराम बिश्नोई


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शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

नजरिया- एक युवा सोच : युवाओं की सोच बदलने वाली अंकित कुंवर की पुस्तक का रिव्यू

"नजरिया- एक युवा सोच" जैसा कि शीर्षक से ही स्पष्ट होता है कि लेखक के मन में क्या है? पुस्तक के बारे में कुछ कहने से पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि भविष्य युवाओं का ही है। जिस देश में युवा ताकतवर होंगे, वह देश ताकतवर होगा। आज राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो प्राय: सभी राजनीति दल भी इसी राह पर चल रहे हैं और युवाओं का आगे कर रहे हैं। हमारे देश में भी युवाओं की अच्छी खासी आबादी है। युवाओं में असीम ऊर्जा होती है। वह कुछ भी कर गुजरने में सक्षम होते हैं। जिसने भी युवाओं को पहचान लिया, समझो उसने भविष्य पहचान लिया। इसके बावजूद आज युवाओं के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है। सरकार की नीतियां भी युवाओं का केन्द्र में रखकर बनती हैं। युवा पीढ़ी ताकतवर रहेगी तो हम ताकतवर रहेंगे। युवा शिक्षित होंगे तो देश शिक्षित होगा। युवाओं के कंधे पर ही सब कुछ टिका है। 

Najariya ek yuva soch book review, ankit kunwar book


लेखक अंकित कुंवर स्वयं एक युवा हैं और जाहिर है कि उन्होंने इस सोच को जागरूक करने के लिए अपने लेखों का ताना-बाना बुना है। चार खंडों में विभक्त इस संग्रह में लेखक ने अपने लेखों को शामिल किया है। इन लेखों में समाज में फैली विसंगतियों को जहां रेखांकित किया गया है, वहीं एक राह दिखाने का भी प्रयास किया गया है। 

पहला खंड : समसामयिक विषय
पहले खंड में विश्व में हिंदी की दशा और दिशा में यह प्रयास किया गया है कि युवा वर्ग को बताया जाए कि हिंदी अब ऐसी भाषा नहीं रही कि किसी देश में उसे गंभीरता से न लिया जाए। अब हिंदी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी खंड में जहां सप्तक के सिद्ध कवि के बारे में युवा पीढ़ी को बताने का प्रयास किया गया है, वहीं जम्मू-कश्मीर की अनूठी संस्कृति को भी रेखांकित किया गया है। भारत की विदेश नीति में भारत-इजरायल के संबंधों का उल्लेख करते हुए यह अवगत कराने का प्रयास लेखक ने किया है कि युवा पीढ़ी को अपने देश की विदेश नीति से भी अवगत रहना चाहिए।

दूसरा खंड : राजनीतिक परिदृश्य
दूसरे खंड में राजनीति में हो रहे बदलाव, संविधान के अनुच्छेद ३५-ए, कामयाबी के शिखर पर मोदी लहर, दलित समुदाय और संसद की गरिमा को रेखांकित करते हुए यह बताने का प्रयास किया गया है कि युवा पीढ़ी को अपने देश के बारे में जानकारी रखनी ही चाहिए। 

तीसरा खंड : मुद्दों पर आधारित 
तीसरे खंड में देश के सामने खड़े मुद्दों को रेखांकित किया गया है। देश के सामने बहुत सारे मुद्दे हैं। इसमें भ्रष्टाचार, भुखमरी, जलवायु, सृष्टि के लिए आवश्यक लैंगिक असमानता की बढ़ती खाई, जल संरक्षण ओर किसानों की समस्याओं को रेखांकित किया गया है।

चौथा खंड : व्यंग्यात्मक निबंध 
चौथे खंड में अपने व्यंग्य लेखों के माध्यम से संग्रह में गंभीरता को हल्का करने का प्रयास किया गया और सामाजिक मुद्दों को हलके-फुलके ढंग से पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया हैॅ।

कौन हैं अंकित कुंवर
लेखक अंकित कुंवर पिछले काफी वक्त से देश के विभिन्न समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में लिखते रहे हैं। उनका नाम नया नहीं है लेकिन उनका प्रयास नया है और माना जा सकता है कि नई पीढ़ी इस संग्रह में कुछ नया पाएगी। 

पूर्व राष्ट्रपति द्वारा पुस्तक का लोकार्पण 
गौरतलब है अंकित कुंवर द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन शुक्रवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा किया गया। पुस्तक विमोचन के अवसर पर माननीय प्रणब मुखर्जी ने उन्हें मुद्दों पर आधारित पुस्तक लेखन हेतु शुभकामनाएं दीं एवं लेखन को निरंतर जारी रखने के लिए प्रेरणा दी। इस पुस्तक विमोचन से पहले युवा लेखक अंकित कुंवर अपनी पुस्तक 'नज़रिया एक युवा सोच' की पहली प्रति श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को भेंट कर चुके हैं।  
आप इस पुस्तक के ऐमज़ॉन से ऑनलाइन खरीद सकते हो।

(लेखक अपनी नई पुस्तक को रिव्यू के लिए DelhiTV.in को भेज सकते हैं।  इसके लिए DelhiTV.in कोई शुल्क नहीं लेता हैं। ज्यादा जानकारी के लिए मेल - jambhsnehi@gmail.com)

बुधवार, 21 नवंबर 2018

झालरापाटन - वसुंधरा राजे या मानवेंद्र जसोल, कौन जीतेगा ? पढ़िए सटीक विश्लेषण

झालरापाटन सीट वैसे तो वसुंधरा राजे के गढ़ के तौर पर देखी जाती है ...यहां मैं इस सीट को बीजेपी का गढ़ नहीं कह रहा हूं, ये ध्यान देने लायक है ...वहीं इस सीट पर मानवेंद्र सिंह के उतरने से क्या वसुंधरा राजे का तिलिस्म टूट जाएगा या फिर मानवेंद्र का स्वाभीमान धराशाही हो जाएगा ...इसको समझने के लिए पहले आपको यहां के जातिगत समीकरण समझने होंगे 

झालरापाटन से वसुन्धरा के सामने मानवेन्द्र सिंह

जातिगत समीकरण :
इस सीट पर करीब 40,000 मुस्लिम मतदाता, 28000 दांगी, 20000 राजपूत, 21000 ब्राह्मण, 13000 धाकड़, 21500 गुर्जर और करीब 19000 राठौर तेली मतदाता हैं.......

अब आपको वो मुद्दे बताते हैं जो वसुंधरा या मानवेंद्र किसी को भी जिता सकते हैं या फिर हरा सकते हैं ...

वसुंधरा राजे के पक्ष व विरोध में
पक्ष में :
1. वर्तमान मुख्यमंत्री होना उनके पक्ष में है
2. 3 बार पहले भी जीत चुकी हैं, जातिगत समीकरणों को अपने और पुत्रवधु के रिश्तों के साथ साधती हैं
3. झालरापाटन में कार्यकर्ताओं पर अच्छी पकड़ है
4. झालरापाटन के विकास में अच्छी भूमिका निभाई है
5. जाट, राजपूत और गुर्जर जाति को रिश्तों के जरिए साधती हैं

विरोध में :
1. एंटी इंक्बेंसी वसुंधरा के खिलाफ जा सकती है
2. फिल्म पद्मावत और आनंदपाल प्रकरण के बाद राजपूत बीजेपी से नाराज हैं
3. 2 अप्रैल का दलित आंदोलन बीजेपी के खिलाफ काम करेगा
4. सचिन पायलट का गुर्जर होना और मानवेंद्र का राजपूत होना ..गुर्जर और राजपूत वोटों को प्रभावित करेगा
5. मुस्लिम वोट बीजेपी से इतर कांग्रेस के साथ जा सकता है
6. झालरापाटन में दलित, राजपूत, मुस्लिम और दांगी मिलकर वसुंधरा को हरा सकते हैं

मानवेंद्र के पक्ष-विरोध में क्या है ?
पक्ष में :
1. मानवेंद्र स्वाभीमान के नाम पर राजपूत वोट हासिल कर सकते हैं
2. मानवेंद्र कांग्रेस की वजह से मुस्लिम वोट हासिल कर सकते हैं
3. दलितों की बीजेपी से नाराजगी मानवेंद्र के पक्ष में दिख सकती है
4. मानवेंद्र का इतिहास वसुंधरा राजे पर भारी पड़ सकता है
5. सचिन पायलट अगर झालरापाटन में प्रचार करने पहुंचे तो गुर्जर वोटों को वसुंधरा से छिना जा सकता है
6. गुर्जर, राजपूत, दांगी और मुसलमान और दलित मानवेंद्र को आसानी से जिता देंगे

विरोध में :
1. मुख्यमंत्री के खिलाफ मैदान में आना ही मानवेंद्र के विरोध में है
2. बाडमेर से आकर झालरापाटन में चुनाव लड़ना मानवेंद्र को कमजोर बनाता है
3. झालरापाटन में कांग्रेस के संगठन का कमजोर होना भी मानवेंद्र के खिलाफ है
4. जनता के साथ जुड़ना मानवेंद्र के लिए बड़ी चुनौती होगी
5. मानवेंद्र का नाम मुख्यमंत्री की रेस से बाहर होना भी मानवेंद्र को साधारण बनाता है

निष्कर्ष - वसुंधरा अगर हारती है तो हार के पीछे राजपूत और दलित आक्रोश और मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण होगा और अगर मानवेंद्र हारते हैं तो इसके पीछे उनका झालरापाटन से जुड़ाव ना होना होगा ...लेकिन ये तय है कि मुकाबला आसान नहीं रहेगा .....

विजेन्द्र सोलकी, 1st india news Rajasthan News anchor and Sub-editor
✍ सीनियर न्यू़ज एंकर एवं फर्स्ट इंडिया न्यूज राजस्थान के सब-एडिटर विजेन्द्र सोलंकी जी की एफबी वॉल से अनुमति के तहत

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टोंक में सचिन जीतेगा या युनूस - जरूर पढ़ें

राजस्थान की सबसे हॉट सीट बनी हुई है टोंक ...लेकिन इस सीट पर सचिन पायलट जीतेंगे या फिर युनूस खान ..इसको समझने के लिए मैं आपके सामने कुछ आंकड़े रखता हूं ...जरा समझने की कोशिश कीजिए किसके क्या खिलाफ जाएगा, क्या पक्ष में जाएगा 

सचिन v/s यूनूस खान, टोंक में सचिन जीतेगा या यूनस खान

सचिन पायलट के पक्ष में
1. जनता में संदेश कि उनके वहां से अगला मुख्यमंत्री होगा
2. अल्पसंख्यक और गुर्जर मतदाताओं के समर्थन की उम्मीद
3. 2 अप्रैल के बाद दलितों के विरोध का फायदा कांग्रेस उठाने की कोशिश करेगी
इनको मिलाया जाए तो आसानी से बहुतम का आंकड़ा सचिन पायलट को मिल जाएगा

सचिन पायलट के खिलाफ
1. सचिन पायलट टोंक से नहीं है, ये उनके खिलाफ जाएगा
2. युनूस खान के खड़े होने की वजह से मुस्लिम मतदाताओं का साथ नहीं मिलेगा
3. बीजेपी मुस्लिम नेताओं को संदेश देगी कि राजस्थान में सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी को उतारा है अगर वो भी हारा तो आगे टिकट नहीं दिया जाएगा
4. अशोक गहलोत का ये कहना कि प्रदेश में एक नहीं बल्कि 5-6 मुख्यमंत्री दावेदार हैं, सचिन के मुख्यमंत्री के दावे को कमजोर कर रहा है

युनूस खान के पक्ष में
1. युनूस खान का मुस्लिम चेहरा होना ही उनका सबसे मजबूत पक्ष है
2. 65 हजार से ज्यादा मुस्लिम मतदाता होना युनूस खान को मजबूत बनाता है
3. कांग्रेस में फूट के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा
4. पूरी सरकार यहां सचिन के खिलाफ नजर आ सकती है

युनूस खान के विरोध में
1. अजित मेहता के टिकट कटने से भीतरघात का खतरा रहेगा
2. युनूस खान के विपरीत कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद का दावेदार होना युनूस के पक्ष को कमजोर करता है
3. दलित वोट बैंक की नाराजगी युनूस खान पर भारी पड़ सकती है, जिनकी तादात 40 हजार से ज्यादा है
4. बीजेपी की 5 सालों में टोंक में नाकामी का खामियाजा युनूस खान को उठाना पड़ेगा

निष्कर्ष - सचिन पायलट अगर हारते हैं तो इसके पीछे कांग्रेस का ही हाथ होगा और अगर युनूस खान हारते हैं तो उसके पीछे मुस्लिम मतदाताओं और दलितों की बीजेपी से नाराजगी

सीनियर न्यू़ज एंकर एवं फर्स्ट इंडिया न्यूज राजस्थान के सब-एडिटर विजेन्द्र सोलंकी जी की एफबी वॉल से अनुमति के तहत



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गुरुवार, 15 नवंबर 2018

शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

साहेब ! जुमला नहीं, जॉब चाहिए : युवा-हल्लाबोल

2014 में मोदीजी ने हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। लेकिन हाल ही में दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना इस साल बेरोजगारी दर  बढ़ी हैं। तो वहीं हैरानी की बात यह है साढ़े चार साल में कितनी नौकरियां दी इसके सरकार के पास अधिकारिक आंकड़े भी नहीं हैं। दुसरा, जहां नौकरियां हैं वहां पर देने के बजाय उसे लटकाया जा रहा हैं। जिसके कारण युवाओं में रोष व्याप्त हैं। इसी कड़ी में युवाहल्ला टीम ने देशभर में नौकरियां की समस्याओं को लेकर आंदोलन करने का मन बनाया हैं। जिसके चलते टीम, युवाओं के बीच जाकर पंचायत का आयोजन कर रही हैं 

Yuva hallabol yuva panchayat
नई दिल्ली | सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार और अवसरों की कमी के सवाल पर युवा-हल्लाबोल ने देश के कई हिस्सों में युवाओं की पंचायत का आयोजन किया। पंचायत में युवा प्रतिनिधियों ने बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन चलाने की रूपरेखा बनाई और अपने अपने शहरों में युवा-हल्लाबोल के आयोजन का निर्णय भी लिया। 

ज्ञात हो कि युवा-हल्लाबोल सरकारी नौकरी में अवसरों की कमी और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चल रहा राष्ट्रव्यापी आंदोलन है। एसएससी घपले के ख़िलाफ़ भी युवा-हल्लाबोल ने देशभर में प्रदर्शन और दिल्ली के संसद मार्ग पर रैली का आयोजन किया था। जाने माने वक़ील श्री प्रशांत भूषण अब एसएससी का मामला उच्चतम न्यायालय में लड़ रहे हैं। रोज़गार की आस लगाए छात्रों के लिए युवा-हल्लाबोल देश के आक्रोशित और आंदोलित युवाओं की असरदार आवाज़ है।

युवा-हल्लाबोल का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने कहा कि युवा-हल्लाबोल के द्वारा आज कई शहरों में पंचायत का आयोजन किया गया है जिसमें आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा हुई। कोलकाता, पटना, जयपुर, भोपाल, इलाहाबाद, रेवाड़ी, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे समेत देश के कई शहरों में बैठकें हुई हैं। यह स्पष्ट हो गया है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहा छात्र अब सिस्टम की नाकामी के सामने मौन नहीं रहेगा और इस संघर्ष को सार्थक अंजाम तक पहुंचाएगा। तरह तरह की भर्ती परीक्षाओं में हुए धांधली के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्र अब युवा-हल्लाबोल के माध्यम से अपनी मांगों को और मजबूती से उठा रहे हैं।

युवा-पंचायत में हुए संवाद से यह स्पष्ट हो गया कि छात्रों में सरकार की उदासीनता को लेकर भारी रोष है। अपने भविष्य को लेकर युवा अनिश्चित हैं और अंधकार में हैं। चिंता जाहिर की गई कि अगर युवा ही असुरक्षित हों तो देश का भविष्य भला कैसे सुरक्षित हो सकता है।

4 लाख नौकरियां की खत्म
सरकारी नौकरियों में आज 24 लाख से ज़्यादा पद रिक्त हैं। लेकिन इन्हें भरने की बजाए केंद्र सरकार ने 4 लाख पदों को ख़त्म कर दिया। एक तरफ जहाँ दिन ब दिन देश की आबादी बढ़ रही है, सरकार नौकरियों की संख्या कम करते जा रही है। जो थोड़ी बहुत नौकरियां हैं भी तो वो किसी न किसी तरह के भ्रष्टाचार या धांधली का शिकार हो जा रहे हैं। पढ़े लिखे छात्र इस भ्रष्ट तंत्र में पिसते जा रहे हैं। आये दिन कोई न कोई पेपर लीक या नौकरी बेचने वाले गिरोहों की ख़बर मिलती है। ऐसे में शिक्षित युवाओं का देश की परीक्षा प्रणाली से भरोसा उठता जा रहा है। सरकारी नौकरी के लिए आज मेहनत या मेरिट की जगह पैसा या पैरवी ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे वक़्त में जब हमारी चुनी हुई सरकारों को युवाओं की पीड़ा समझकर इसका समाधान करना चाहिए था तो सरकार मानने को भी तैयार नहीं कि बेरोज़गारी एक समस्या है। युवा पंचायत ने एक सुर में सरकार को कहा है कि देश के युवाओं को जॉब चाहिए, जुमला नहीं। 

Yuva halla bol yuva panchayat


अनुपम ने कहा कि युवा-हल्लाबोल के माध्यम से देशभर के युवा अब बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ सामूहिक संघर्ष के लिए एकजुट हो रहे हैं। बड़े दुर्भाग्य की बात है कि देश की दशा दिशा तय करने वाले युवाओं को अपना भविष्य ही आज अंधकारमय दिख रहा है। जिनके समर्थन से यह सरकार बनी, जिनको सालाना दो करोड़ नौकरी का वादा करके ये सत्ता में आए, आज उन्हीं युवाओं के साथ सरकार ने छल किया है।
✍ दिल्लीटीवी न्यूज नेटवर्क

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रविवार, 21 अक्तूबर 2018

Opinion Poll : 2019 में कौन बनेगा PM

जनता से ऑपिनियन पॉल- कौन बनेगा  2019 में प्रधानमंत्री


रविवार, 7 अक्तूबर 2018

आज की बड़ी खबरें : 07 अक्टूबर 2018

यदि आप राजस्थान सहित देश-विदेश की आज की ताजा खबर शॉर्ट में पढ़ना चाहते हो तो बिल्कुल सही जगह पर आए हो। तो पढ़िए आज की ताजा खबर...

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देश की बड़ी खबरें 

राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में  विधानसभा चुनाव का मतदान नवम्बर-दिसम्बर में, पांचो राज्यों का 11 दिसम्बर को आएंगें नतीजे

क्रिकेट : भारत ने 272 रन से वेस्टइंडीज को हराया, टेस्ट सीरीज में 1-0 से बनाई बढ़त

तनुश्री बवाल : नाना पाटेकर ने फिर दिया बयान, कहा- 'जो झूठ हैं, झूठ ही हैं' | नाना पर शूटींग के दौरान यौन शोषण का लगा था आरोप 

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस गोगोई ने जताई चिंता, कहा- वकीलो-जजों की संख्या कम हैं | बार काउसिंल ऑफ इंडिया के इवेंट में कहीं बात

मायावती के बाद सपा के अखिलेश ने दिया कांग्रेस को झटका, बोले - गठबंधन के लिए कांग्रेस ने बड़ा इंतजार कराया | मध्यप्रदेश में सपा ने उतारे उम्मीदवार

विदेश की बड़ी खबरें

पाकिस्तान : भ्रष्टाचार के मामले में PMLN अध्यक्ष शाहबाज शरीफ को ACO ने किया अरेस्ट

अन्तरराष्ट्रीय पुलिस ऑर्गनाइजेशन के चीफ मेंग हॉन्गवेई चीन दौरे के बाद लापता, पत्नी ने फ्रांस में दर्ज कराई गुमशुदगी | फ्रांस पुलिस कर रही तलाश

राजस्थान की बड़ी खबरें

राजस्थान विधानसभा चुनाव : 7 दिसम्बर को वोंटिग, 11 दिसम्बर को आएगें नतीजे | कल चुनाव आयोग ने किया ऐलान, राज्य में आचार-सहिंता लागू

अजमेर : राजे की गौरव यात्रा समापन के मौकें पर गरजे PM मोदी, कहा - पुरे देश-वासी हमारी हाईकमान | कांग्रेस पर साधा निशाना

राजस्थान के किसानों का 1 साल तक 10 हजार तक बिजली बिल माफ, हर महीने किसान के खाता में आएगें 833 रूपए

भीलवाड़ा : धीरज गुर्जर के समर्थन आई महिला नेता, टावर पर चढ़ी | पहले से ही दो दिन से टावर पर बैठें हैं 8 छात्र

मंगलवार, 2 अक्तूबर 2018

आज की बड़ी खबरें : 02 अक्टूबर 2018

देश दुनिया बड़ी खबरें पढ़ना चाहते हो तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हो। तो लिजिए पढ़िए भारत और विदेश की बड़ी खबरें शॉर्ट में...

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देश की बड़ी खबरें
नई दिल्ली : विवेक हत्या कांड पर ट्विट कर फसे दिल्ली CM केजरीवाल, कहा था - विवेक तो हिन्दू था, उन्हें क्यो मारा | अब BJP ने केजरीवाल पर FIR के लिए थाने दी शिकायत

4 अक्टूबर को भारत आएगें रूसी राष्ट्रपति पुतिन, रूस देगा भारत को 39 हजार करोड़ का मिसाइल तंत्र | वहीं अमेरिका डील का कर रहा विरोध

पहले NCP प्रमुख शरद पवार ने राफल पर मोदी का बचाव किया, अब अपनी पार्टी में नुकसान होने से पलटे ; कहा- PM मोदी का नहीं किया समर्थन, राफल पर सरकार जवाब दें

विवेक हत्याकांड : मृतक पत्नी को सोनिया गांधा ने फोन पर दी सांत्वना, वहीं CM योगी से भी की मुलाकात | मामले में नेताओं की सांत्वना सियासत जारी, कांग्रेसी-अखिलेश यादव भी पहुंचे मृतक के घर

देश के 45वें चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का हुआ विदाई समारोह, मिश्रा बोले- गुडबाय नहीं, फिर मिलेंगे | आज से रंजन गोगोई होगें नए CJI

विदेश की बड़ी खबरें -
POK कश्मीर PM बोले - सैन्य हेलिकॉप्टर नहीं था, न हीं भारतीय सीमा में आया  | उस हेलिकॉप्टर में खुद को सवार बताया

पाकिस्तान : पटरी पर रेहड़ी लगाने वाले के खातें में आये 2.25 अरब रूपए, पाक एंजेसी जांच में जूटी

मालदीव : सोतेलें भाई के चुनाव हारते ही पूर्व राष्ट्रपति गयूम  को मिली जमानत | सरकार गिराने के मामले में फरवरी में हुई थी गिरफ्तारी

पाकिस्तान ने फिर लिया झूठ का सहारा, भारत को निशाने बनाने के लिए डाक स्टैम्प पर लगाई फर्जी तस्वीरें

✍ अणदाराम बिश्नोई

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रविवार, 30 सितंबर 2018

राजस्थान में इस ग्रामीण छात्र ने उठाया गांवो को टेक्नोलॉजी से जोड़ने का बीड़ा

राहिल ने इसी साल 12वीं जमात की पढ़ाई पुरी की हैं। पिछले 2 साल में उन्होने कई सारे एप्प बनाएं। यह कार्य अभी भी रूका नहीं हैं। ग्रामीण परिवेश के होने से शुरूआत में कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कम्प्यूटर की भाषा नहीं आती थीं। Youtube से यह सब सीखकर अपनी मेहनत की कहानी खुद लिखी हैं

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फोटो • छात्र राहिल मोहम्मद
राहिल मोहम्मद राजस्थान के अलवर में मौजपुर (लक्ष्मणगढ़) गांव का रहने वाला हैं। माता गृहणी हैं। पिता बसरूद्दीन मोहम्मद सरकारी अध्यापक हैं। 10th तक की पढ़ाई गांव के ही स्कुल में की। जो कि हर कोई छात्र करता ही हैं। लेकिन राहिल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वो भाषण किसी टर्निग पॉइट से कम नहीं था, जब उसने टीवी पर मोदी द्वारा इमरान की तारीफ करते सुना कि "मेरा देश अलवर के इमरान में बसता हैं"। इस वाक्य से राहिल के दिमाक में कुछ ऐसा करने की बात घर कर गई, जैसा इमरान कर रहे हैं। आपको बता दे कि अलवर के इमरान ने शिक्षा से संबंधित एप्प बनाकर विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई आसान कर दी। PM मोदी को जब इसके बारें में पता चला तो इमरान की प्रशंसा की।

राहिल बताते है "मैने यह काम तब शुरू किया, जब 10th के बाद 11th में आया। ग्रामीण पृष्ठभूमि होने से एप्प कैसे बनाते यह सब मूझे बिल्कुल मालूम नहीं था। Google और Youtube का सहारा लेकर यह सब सीखा। पहला एप्प हिंदी व्याकरण का बनाया। लेकिन Google Play Store  पर एप्प पब्लिश करने के लिए एकाउंट बनाने के लिए हजारों रूपए की जरूरत होती हैं। जो मेरे जैसे 11th के विद्यार्थी के लिए जुटाना मुश्किल था। लेकिन मैने हार नहीं मानी और इसका भी समाधान निकाला"

यह भी देखें : चौकिए मत यह कोई न्यू फैंशन ट्रेंड नहीं, कुछ और हैं

स्कूल की वेबसाइट बनाकर पैसों का किया इंतजाम
कम्प्यूटर भाषा सीखने के बाद राहिल ने एप्प तो बना दिया, लेकिन समस्या थी कि आखिर इसे विद्यार्थियों तक पहुंचाएं कैसें? क्योकि Google Play Store पर पब्लिश करने के पैसे लगते हैं। राहिल आगे कहते हैं "इसके लिए मैने फिर वेबसाइट बनाना सीखा और एक स्कूल की वेबसाइट बनाकर मैने 2000/- के आसपास कुछ पैसे जूटाएं। फिर Google Play Store पर अकाउंट बनाकर एप्प को पब्लिश कर दिया। इसके बाद मै अबतक कुल 12 एप्प्स बना चूका हूं। मेरे एप्प विद्यार्थियों के बेहद उपयोगी हैं। मैने अपने गांव मौजपुर के लिए भी एप्प बना रखा हैं,जिसमें गांव की सारी आवश्यक सामग्री व जानकारियां हैं, ताकि डिजीटल भारत में मेरा गांव पीछे न रहें।"

एप्प बनाने का काम शुरू में माता-पिता को बिना बताएं किया। इमरान ने यह सारा काम राहिल के पिता को बताया। तो वह काफी खुश हुएं और कहा कि यह तो बहुत अच्छा काम हैं, इसमें छुपाने की क्या बात हैं? राहिल बताते है "मेरे इन एप्स के बारे में स्वंय इमरान सर ने लक्ष्मणगढ में एक स्पीच के दौरान वहॉं उपस्थित सभी लोगो को बताया और मेरी उनसे मुलाकात भी कराई"

यह भी देखें : लघु कहानी - दबंग महिला

राहिल के यह सारे एप्प्स विद्यार्थियो के लिए लाभदायक हैं। खासकर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए। सबसे अच्छी बात इन एप्प्स में कोई विज्ञापन नहीं आता हैं, ताकि पढ़ने में कोई दिक्कत न हो।
इन सारे एप्स को यहां से डाउनलोड किया जा सकता हैं (क्लिक करें)
✍ अणदाराम बिश्नोई


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