शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

मांओ के इन लालों की किसको फिक्र !

दिल्ली में डीटीसी बसों से लटकतें स्कूली बच्चे, कभी भी हो सकता बड़ा हादसा, हर कोई देख रहा हैं फिर भी चुप।  मांओ के इन लालों की क्यों नही हो रही किसी को फिक्र !

दिल्ली की डीटीसी बसों में गेट के बाहर लटक यात्रा करते हुएं • फोटो : अणदाराम बिश्नोई

नई दिल्ली | दिल्ली की चलती डीटीसी बसों से स्कूली स्टुडेन्ट्स का गेट से बाहर लटककर  यात्रा करना  लगता हैं अब आम बात हो गई। ऐसा ही एक नजारा ईस्ट ऑफ कैंलाश में देखने को मिला। स्टुडेन्ट्स की  यह मजबूरी हैं या लापरवाही । यह गंभीर समस्यां हैं। क्योकि अगर यह सबकुछ ऐसा ही चलता रहा तो कोई बड़ा हादसा होने में देर नहीं लगेगी। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। सवाल यह भी कि नियमानुसार चलती बस का गेट बंद रहना चाहिए  तो इन बच्चो की सुरक्षा की दृष्टी से सह-चालक मना क्यो नहीं करते। दुसरा पहलू यह भी सामने आता है कि इन स्कूली बच्चो की मजबूरी भी रहती हैं। क्योकि डीटीसी बसों की रूट फ्रीक्वेंसी कम होती हैं ,जब स्कुल की छुट्टी हो जाती हैं।
अणदाराम बिश्नोई
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DTC Bus में गेट के बाहर लटक कर यात्रा करने में मजबूर स्कूली बच्चें • फोटो : अणदाराम बिश्नोई

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

नई दिल्ली : JACP नें निकाला केन्डेल मार्च, कहा- नीतिश दें इस्तीफा

दिल्ली यूनिवर्सिटी के सत्यवती कॉलेज में केन्डेल मार्च। JACP नें निकाला केन्डेल मार्च। देश में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता।

सत्यवती कॉलेज में केन्डेल मार्च निकालते JACP कार्यकर्ता

मालूम हो कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम ( बालिका-गृह ) में मासूम बालिकाओं के साथ अत्याचार की आग अभी ठंडी भी नही हुई कि आज योगी जी के राज्य उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले के शेल्टर होम में मासूमों के साथ बर्बरता की बात जँगल में आग की तरह फैलने लगी है ।
जो इशारा करता है कि अगर सही से जांच की जाय तो देश के बहुत सारे शेल्टरों में हो रहे हैवानियत का भण्डा फुट सकता हैं। और सत्ता अफसरों से हो रहे इस खेल में कई चर्चित नामचीन लोग का  चेहरा बेनकाब हो सकता हैं ।
इसी को लेकर JACP  व संरक्षक पप्पूयादव  के निर्देश से विशाल कैंडल मार्च निकाली गई । जिसमें पार्टी के महासचिव फाजिल अहमद ,छात्र अध्यक्ष जैद खान , मनोज गुप्ता ,अछ्य चूक , धीरज रंजन , आशुतोष रॉय ,अखिलेश चौधरी, अंकित तिवारी, लक्ष्य सिंह , राजेश ,मनीष ,बिकु आदि लोगों  इसमें शामिल हुए
मार्च के उपरांत बच्चियों के लिये 2 मिनट का मौन व्रत रखा गया और इसके साथ ही नीतीश सरकार से इस्तीफा की मांग की गूंज पूरे महाविद्यालय में  गूंजी ।
दिल्ली टीवी न्यूज नेटवर्क
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बुधवार, 4 जुलाई 2018

तस्वीर-एँ-बयाँ : पेड़ो से यमुना को बचाने का प्रयास

आगरा | यमुना को बचाने के लिये नदी के किनारे लोगों ने वृक्षारोपण किया। समाज सेवी आराम सिंह गुर्जर नें बताया कि 500 वृक्ष और लगाने के लिए आगरा DM को अवगत कराएगें।

गुरुवार, 21 जून 2018

जैसलमेर की यह ग्राम पंचायत हो गई एक अजीब बीमारी से ग्रस्त, लाख कोशिश पर भी नहीं मिल रहा ग्रामीणो को समाधान !

"साफ नियत , सही विकास" यह प्रधानमंत्री जी ने अब चार साल पुरे होने पर नया नारा निकाला हैं।शायद इसलिये कि देश के गांवो का जमीनी स्तर पर काम  उन्हे मालुन न हो । भला उन्हे मालुम कैसे होगा? जब किसी गांवो के विकास की असलियत को दिखाने के लिये मीडिया तक मुँह फेर ले। ऐसी ही मुसीबत से  जैसलमेर का यह गांव कई अरसो जूझ रहा हैं। 


पाकिस्तान सीमा-बॉर्डर से सटे मदासर गाँव की लगभग पिछले 35 साल से सत्ता एक ही परिवार के हाथ में है। विकास के नाम कागजो में काफी काम हुआ हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कुछेक की नाम मात्र की खानापूर्ति मिल जायेगी,तो कही पर पुरा काम ही गायब मिलेगा। संक्षेप में कहे तो जैसलमेर की इस ग्राम पंचायत के विकास को भ्रष्टाचार ,दीमक की तरह खा रहा हैं। 

इन्दीरा गाँधी नहर के कारण ज्यादातर ग्रामीण खेती-बाड़ी का काम करते हैं। ग्रामीणो के अपने काम में मश्गुल रहने  तथा जागरूकता के अभाव के चलते भ्रष्टाचार की जड़े गहरी जमी हुई हैं।  जिन्हे कुछेक जागरूक लोगो के कवायद से फेंकना मुश्किल हो रहा हैं। प्रशासनिक अधिकारी से लेकर मीडिया वालो तक मदासर सरपंच का बोलबाला हैं। भला ! होगा क्यो नहीं, जब तीन दशक से ज्यादा समय से सत्ता पर काबिज हैं।  
अभी हाल ही में ग्राम पंचायत के द्वारा किये गये कामो की कई अनियमितताएँ सामने आई हैं। पीड़ित दर-दर ढोकरे खाते फिर रहे हैं ,समाधान निकलने की दुर की बात कोई शिकायत सुनने तक तैयार नहीं हैं।

घपले-बाजी का नया खेल
नरेगा योजना के तहत टांका निर्माण की प्रक्रिया में इस ग्राम पंचायत ने एक अलग गड़बड़झाला किया। ग्राम पंचायत मदासर के द्वारा 'अपना खेत अपना काम' योजना के अन्तर्गत लाभार्थी  राजाराम के साथ ठगी का मामला सामना आया, जिसमें टांका निर्माण सामग्री उपलब्ध नही करवा कर ग्राम पंचायत पर सरकारी धन के दुरूपयोग का आरोप हैं।
     मालूम हो इस योजना के तहत चयनित लाभार्थी अपने खेत में भूसमतलीकरण, टांका निर्माण जैसे कार्य करवा सकता हैं। जोकि मनरेगा के तहत  काम होता हैं। मदासर निवासी लाभार्थी राजाराम पुत्र नथुराम ने टांका निर्माण के लिये आवेदन किया तो उसे    निर्माण सामग्री नहीं होने का हवाला देकर खुद की सामग्री से निर्माण करने को ग्रा.पं. के पदाधिकारियो के द्वारा कहा गया। साथ यह भी कहा कि बजट आने पर लाभार्थी राजाराम को भूगतान दिया जायेगा। जबकि योजनानुसार लाभार्थी को सामग्री देने का प्रावधान हैं।
इसके बाद  राजाराम भूगतान को लेकर इन्तजार करता रहा हैं। लेकिन अब पदाधिकारियो ने यह कहकर मना कर दिया कि पीछे से ग्राम पंचायत को भूगतान नहीं हुआ हैं।
राजाराम, निर्मित्त टांका के साथ
अपना खेत अपना काम योजना : यूँ खेला पैसा-गबन खेल

• शुरू में बजट न होने का झांसा देकर ग्राम पंचायत के पदाधिकारीयों नें लाभार्थी को टांका निर्माण सामग्री लाने को कहा। लेकिन योजनानुसार सामग्री ग्रां पंचायत के उपलब्ध करवाती हैं।
• फिर राजाराम ने इस योजना के अन्तगर्त खुद की निर्माण सामग्री से  टांका निर्माण करवाया।
• इस संबंध में राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने पर जवाब आया कि लाभार्थी को ग्राम पंचायत एंजेन्सी द्वारा टांका निर्माण कर लाभान्वित कर दिया गया हैं।
• मतलब साफ हैं कि टांका का निर्माण सामग्री का भूगतान ग्राम पंचायत को प्राप्त हो गया हैं। अब सवाल यहां उठता है आखिर सामग्री का बजट गया कहां?
जिससे साफ जाहिर हैं कि ग्राम पंचायत के पदाधिकारियो ने पैसे गबन का यह एक खेल खेला हैं।
• साथ में अपना इस करतुत को छुपाने के लिये मनरेगा के ऑनलाइन पोर्टल पर लाभार्थी राजाराम के टांका निर्माण विवरण में कार्य को चालू( ऑन-गोइग) बता के रखा हैं। हैंरत की बात यब कि सामग्री की राशी का कोई विवरण नही दिखाया गया हैं। जबकि यह काम 2015-16 फाईनेन्सियल ईयर का हैं।
• इस तरह से आनुमानित 1 लाख 20 हजार के करीब टांका निर्माण सामग्री का बजट गबन हो गया।
(जैसा पीड़ित राजाराम ने बताया)

इसके अलावा सागर राम के निर्माण किये टांके में भी यही मामला हैं। उनके साथ भी ठगी हुई हैं। वहां के एक निवासी बताते है कि "यह तो सिर्फ दो उदाहरण हैं, इसके अलावा न जाने पुरे गांव में कितने लाभार्थीयो का काम इस घपले बाजी के खेल चढ़ गया होगा,"

लगातार अनशन ,लेकिन बेअसर !
ग्रामीणो ने इस बाबत मदासर ग्राम पंचायत के अटल सेवा केन्द्र पर 16 जून से लगातार धरना दिया। परन्तु कोई असर नहीं हुआ ।
मदासर ग्राम पंचायत मुख्यालय पर 15 जून को राजस्व लोक अदालत शिविर का आयोजन हुआ था। उसके बाद से ग्राम पंचायत का कार्यालय लगातार बंद है तथा सरपंच, ग्राम सेवक व एलडीसी मुख्यालय पर नहीं आ रहे हैं। जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में पट्टा पंजीयन के लिए नरेगा रोजगार आवेदन, जॉब कार्ड का नवीनीकरण करने तथा जन्म मृत्यु पंजीयन हेतु बार बार चक्कर लगा रहे हैं । साथ ही शिविर के बाद ग्रामीणों द्वारा भ्रष्टाचार के विरोध में अनशन पर सागर राम व राजा राम लगातार धरने पर बैठे हुए हैं । लेकिन अभी तक  कोई प्रशासनिक अधिकारी के नहीं आने से अनशन लगातार जारी है । इन अनशन कर्मियों की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है। प्रशासन नजरअंदाज किए जा रहा है। जिला स्तर तक कोई सुनवाई को तैयार नहीं है । एक तरह से लोकतंत्र की हत्या सी हो गई है । मूकदर्शक बने समस्त प्रशासनिक अधिकारी फोन कॉल पर बता रहे हैं कि  अनशन करने से कुछ नहीं होने वाला है । कांग्रेसी सरपंच द्वारा दीमक की तरह समस्त विकास कार्यों को चट कर  दिया है। अपनी राजनीतिक पहुंच से जिला स्तर तक के समस्त प्रशासनिक अधिकारियों को भी स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने दे रहा है। जिसके चलते पिछले 35 वर्षों से एक ही व्यक्ति विशेष द्वारा सरपंच पद पर काबिज  होने से करोड़ों की संपत्ति जुटा रखी है, जिस पर कारवाई करने को कोई तैयार नहीं है
अटल सेवा केन्द्र पर धरना देते आक्रोशित व पीड़ित ग्रामीण
यह है कारनामें
पिछले लंबे समय से चल रही ग्रामीणों की मांगे अभी तक पूर्ण नहीं होने पर ग्रामीणों ने अटल सेवा केंद्र पर धरना देकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। जैसा कि ग्रामीणों द्वारा पहले भी कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन द्वारा अवगत करवा चुके हैं तथा 15 जून को हुए राजस्व लोक अदालत न्याय आपके द्वार शिविर में ग्रामीणजन उपखंड मजिस्ट्रेट व कलेक्टर के आने की आस लगाए बैठे थे, वही केवल उपायुक्त उपनिवेशन नाचना को भेजकर केवल खानापूर्ति की गई । शिविर में समस्या से संबंधित कुछ प्रार्थना पत्रों की पावती भी नहीं दी गई और जिनकी पावती तो दे दी लेकिन उन मूल प्रार्थना पत्रों को ना तो संबंधित विभाग को दिए और ना ही ऑनलाइन दर्ज किया । जिस से आक्रोशित ग्रामीणों ने धरना शुरू किया है। मुख्य मांगो में गोचर व वन विभाग की भूमि से अतिक्रमण हटवाने, ग्राम पंचायत के समस्त विकास कार्यों का भौतिक निरीक्षण करवाने, ग्राम पंचायत द्वारा निजी टांको को अपना बता कर सरकारी राशि का दुरुपयोग, 1 NMD पुलिया से रेशमा राम व बागा राम के खेत तक दो ग्रेवल सड़कें जो मौके पर नहीं है। गबन प्रकरण पर कार्रवाई, राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज ग्राम पंचायत के समस्त परिवाद जिनका ग्राम सचिव व विकास अधिकारी झूठे तथ्य पेश कर रहे हैं। उन पर उचित कार्रवाई, राशन डीलर व डीएसओ की मिलीभगत से अप्रैल से जून 2017 में बायोमेट्रिक सत्यापन करवाने के बाद भी राशन वितरण नहीं करना ,पुलिस थाना नोख द्वारा ग्राम वासियों पर झूठे मुकदमे में उन्हें प्रताड़ित करना तथा पैसे वसूली का निस्तारण आदि मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
1 NMD पुलिया से दृश्य | जहां से बागाराम व रेशमा राम की ढाणी की तरफ दो ग्रेवल सड़क कागजो में बताई गई हैं परन्तु धरातल पर नहीं हैं


✍ अणदाराम  बिश्नोई
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रविवार, 17 जून 2018

तस्वीर-एँ-बयाँ: यहाँ 'न्याय आपके द्वार' शिविर बदल गया "खर्राटे आपके द्वार" में



मदासर(पोकरण) में 15 जून को लगे राजस्व लोक अदालत 'न्याय आपके द्वार' शिविर में अधिकारियों का काम इस तस्वीर में बयाँ हो रहा है। यह स्पष्ट रूप से शिविर की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़ा कर रही हैं। तहसीलदार श्री भगाराम के पास बैठे गिरदावर श्री रामप्रताप खर्राटे भरते हुए।

बुधवार, 13 जून 2018

तस्वीर-एँ-बयाँ : इसे कहते है पत्रकारिता का जूनुन

जोधपुर से ईटीवी राजस्थान ( अभी News18Rajasthan ) के पत्रकार अपने हाथ में फैक्चर होने पर भी आज से ठीक 1 साल पहले सलमान की सुनवाई की कवरेज देने कोर्ट पहुंच गये थे। इनका नाम शेखर व्यास हैं।

रविवार, 10 जून 2018

#LetIndiaShine : कैटरीना जैसी गर्लफ्रैंड, रणबीर जैसा बॉयफ्रैंड चाहिए तो करे यह काम ?

स्वच्छ भारत अभियान की बातें तो हर कोई करता है , तो क्या हर कोई इसका कदर करता हैं? वाकई देश से गंदगी दुर हो रही हैं? Let Shine India कैम्पेन कुछ इस तरह का ही हैं, आइये जाने और कुछ सीखे !!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियो को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिये महात्मा गांधी की जयन्ती के अवसर पर सन् 2014 में स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की थी। उसके बाद हमने देखा कि देश में एक जागरूकता की लहर फैली थी, कईयो ने सड़क साफ की तो कईयो ने बाहर सड़क पर खुले में कचरा न फेंकने की शपश ली। परन्तु समय के साथ यह धीरे-धीरे यह सफाई की पकड़-धकड़म ठंडे बस्ते में चली गई । 

इसलिए अब कई NGO और संगठन इन्हे वापस जीवित करने के लिये प्रयासरत हैं। उनमें में एक कैम्पैन हैं - Let India Shine
इस कैम्पेन की शुरूआत किसी बड़े व्यक्ति ने नहीं की हैं , बल्कि हम जैसे ही एक आम इंसान ने की हैं। इस कैम्पैन के संस्थापक वेद प्रकाश हैं।

क्या है Let India Shine
वैसे देखा जाये यह एक आम इंसान का देश-प्रेम हैं, जो हम सब में होना चाहिए। वेद प्रकाश कहते है , " मोदीजी का काम देश के स्वच्छ रखने के अभियान शुरू करने था बल्कि देश को स्वच्छ रखने जिम्मेदारी हमारी ही हैं। जिसे हम भूल चूके हैं। बस इसको याद दिलाने के लिए मै यह सब कर रहा हुँ।" 
उनका यह भी मानना है कि आज के समय में कुछ अलग हट किये बिना जागरूकता फैलाना कठिन काम हैं। तभी तो लोग स्वच्छ भारत अभियान के बड़े पैमाने पर चलने के बावजूद गंदगी करते नहीं झिझकते हैं। इसलिए प्रकाश ने एक अनुठा तरीका अपनाया हैं। इस कैम्पेन में वो अपने ऑफिस की छुट्टी के दिन हर सप्ताह मेट्रो स्टेशन के आस-पास, जहां पब्लिक मुवमेंट ज्यादा हो, वहां हाथ मे तख्ती लेकर अपनी टीम के साथ खड़े हो जाते हैं। उस तख्ती पर कई मजेदार स्लोगन लिखे होते हैं।
जैसे कुछ इस प्रकार है :
 'गर्लफ्रैन्ड/बॉयफ्रैन्ड चाहिए तो देश के गन्दा मत होने दिजिए' 
'चिक-चिक करने वाली बीवी की कसम मै देश को गन्दा नही होने दुँगा'
वाकई इसमें लोग दिलचस्पी ले रहे हैं, और प्रण करके जाते है कि मै देश को गन्दा नहीं होने दुँगा।

कैसे आया यह ढांसू आइडिया ?
इस पुरे कैम्पैन की देन प्रकाश की खुद की गर्लफ्रैंड ही हैं। इसके पीछे की कहानी बड़ी रोमांचक व प्रेरणादायक हैं।
करीब शाम का वक्त था। ठंडी हवा दोनो के पास से सरसराती गुजर रही थी। वह अपनी प्रेमिका के साथ मुंबई के बांद्रा ब्रिज पर बैठकर एक-दुजे से बतिया रहे थे। जो कि देश का हर प्रेमी-जोड़ा करता हैं। इसमें कोई नई बात नहीं थी। इतने में उसका ध्यान आस-पास पड़ी गंदगी व कचरा पड़ा। दु:खी मन से लेकिन एक राष्ट्र प्रेम की भावना से ओत-प्रोत होकर प्रकाश से कहा, "देखो ! लोग कितने नि:संकोची हो गये, प्रधानमंत्री जी के द्वारा इतना कुछ करने बावजूद भी साफ-सफाई की फ़िक्र नहीं और सार्वजनिक स्थानो पर कचरा यूँ ही फेंक देते हैं। प्रकाश क्यों ना! हम कुछ इस संबंध में कुछ करे "
परन्तु यह बात नई थी। क्योकि अमुमन देश हित के लिए विरले ही प्रेमी जोड़े बात करते हैं।
फिर प्रकाश ने उन्हे वादा किया कि वो कुछ जरूर करेगे इस पर। उसी दिन देर शाम को एक पोस्टर  प्रिन्ट करवाया कर उसे सरप्राइज दिया । पहले पोस्टर का स्लोगन " अपनी गर्लफ्रैंड की कसम, देश की सफाई में योगदान करे।" था।
इसके बाद बाहर पब्लिक पैलेस पर दोस्तो के साथ पोस्टर लेकर खड़े रहने लगे। फिर यह सिल सिला चल पड़ा। लोगो का साथ मिलने लगा, हर कोई यह देखकर देश की सफाई को लेकर अपने आप को जागरूक करने लगा।

हम भी सीखे
अब प्रकाश मुबंई से दिल्ली आने के बाद ,सप्ताह में दो दिन सार्वजिनक जगहो पर अपनी टीम के साथ खड़े रहते हैं। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर कचरा  उठाते भी हैं। 
Let shine India
वेद प्रकाश अपनी टीम के साथ सफाई करते हुवें
हमे भी इस देश की सफाई के बारें में सोचना चाहिए और खुद अब से प्रण करे कि सार्वजनिक जगह पर कचरे को डस्टबीन में ही फेकेगे। लोगो को भी जागरूक करेगे। अगर आप भी  इस मुहिम में शामिल होना चाहते हो तो नीचे सम्पर्क सुत्र हैं। 

कौन हैं वेद प्रकाश 
दिल्ली का दिल कनॉट प्लेस पर वेद प्रकाश कैम्पेनीग करते हुवें
वेद प्रकाश Let India Shine कैम्पेन के संस्थापक हैं। जिसकी शुरूआत आज से करीब 2 साल पहले मुंबई से की थी। वर्तमान में लीला पैलेस होटल में जॉब करते हैं और दिल्ली में रहते हैं। 
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