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त्रिपुरा चुनाव : 25 साल से जीतती आ रही गरीब मुख्यमंत्री की सरकार को अचानक क्या हो गया ?


माणिक सरकार पिछले 25 सालो से त्रिपुरा में जीतती आती रही हैं ,परन्तु अब 2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव मे कैसे पिछड़ गई??? हर किसी को यही सवाल परेशान कर रहा हैं।
पहले आप यह जान लो ⤵

क्या हुआ ?
त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में माणिक सरकार हार गई,जो पिछले 25 साल से राज कर रही थी। माणिक सरकार की पार्टी CPM को सिर्फ 50 मे से 16 सीटों पर ही जीत मिली। बीजेपी ने इस बार बड़ी कामयाबी पाई हैं। 43% वोट शेयर बीजेपी को मिले हैं।
पिछले चुनाव 2013 पर नजर डाले तो बीजेपी की 50 मे से 49 सीटो पर जमानक जब्त हो गई थी और केवल 1.87% ही वोट मिले। जिसकी 1 की जमानत जब्त नहीं हुई, वो भी नहीं जीत पाये। इस तरह से देखा जाये तो 5 साल बाद बीजेपी ने ऐसा कौनसा जादू चला दिया कि 25 साल से त्रिपुरा की जनता के दिलो में राज करनी वाली पार्टी CPM मात खा बैठी।

माणिक सरकार निशाने पर क्यो?
माणिक अपने मुख्यमंत्री के रूप में मिलने वाले वेतन सरकारी फंड मे दान करता था। अब आप सोच सकते है कि कितने ईमानदार व नेक व्यक्ति त्रिपुरा की जनता को मिला हुआ था।
जिसके कारण 25 साल माणिक सरकार की पार्टी जीतती आ रही थी।
तो फिर जनता ने आखिर माणिक सरकार को क्यो नकारा?
क्या केवल माणिक ही ईमानदार थे? बाकि विधायक ने क्या  गुपचुप में अंत में जनहित की तरफ ध्यान देना बंद कर दिया?

माणिक सरकार के हार के निम्न कारण सामने आ रहे हैं-
( नोट: ध्यान दे मैने यह सभी मीडिया रिपोर्ट का अध्ययन कर उसका सरल भाषा में विष्लेषण आपकी आसानी के लिये प्रस्तुत कर रहा हुं।उम्मीद करता हुं आप अच्छे से समझ पायेगे। )


मोदी लहर ने डाला असर
जब से नरेन्द्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने हैं, बीजेपी में तहलका मचा रखा हैं। इसका असर इस बार अभी पुर्वोत्तर के तीनो राज्यो नागालैण्ड,मेघालय व त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव मे साफ झलका। क्योकी जीरो से हीरो बना दिया,त्रिपुरा में।त्रिपुरा के पिछले चुनाव 2013 में बीजेपी को जीरो सीट मिली थी परन्तु अब बीजेपी पुर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही हैं।
सबसे बड़ी बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद 'आओ बदले' चुनाव कैम्पैन के साथ चार बार त्रिपुरा में रैली की और महिलाओ व युवाओ काफी आकर्षित किया।

आखिर क्यो हूवें युवा आकर्षित?
क्योकि माणिक सरकार का फोकस ज्यादातर प्राथमिक शिक्षा पर था और उच्च शिक्ष पर काफी कम ध्यान था। बस मोदी ने युवाओ को इस वादे में फंसा डाला।

बीजेपी के तेज गति के विकास वाला वादे ने मोहित कर लिया त्रिपुरा की जनता को !
ऐसा नहीं है की माणिक सरकार ने विकास नही किया। परन्तु बीजेपी का तेज गति वाला विकास का वादा त्रिपुरा की जनता के जेहन में उतर गया। विकास तो वैसे माणिक सरकार कर ही रही थी। परन्तु जनता के मन मे जल्दी जल्दी विकास होने की बात घर कर गई और माणिक सरकार अपनी ईमानदार व गरीब मुख्यमंत्री का टैग दिखाती ही रह गई।

अमित शाह की नीति लाई रंग
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने त्रिपुरा में पुर्व कांग्रेस के विधायको को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। शाह कहते हैं कि "हम पिछड़े हुये लोगो को साथ लेकर विकास की राह पर हैं।" परन्तु सही मायने में देखे तो यह बीजेपी की कुट-नीतिक राजनीति हैं।

यह थे प्रमुख कारण। अब आपको यह भी दिखा देता हुं कि व्हाट्सअप पर माणिक सरकार व बीजेपी के बारे में क्या चल रहा हैं। पढ़े आगे➡

अणदाराम बिश्नोई ' पत्रकारिता विद्यार्थी '
सम्पादक व लेखक, delhitv.in
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त्रिपुरा में माणिक सरकार की हार के कई मायने हैं।
जिस देश में 5 साल सरपंच जैसा पिद्दी सा पद पाकर लोग करोड़पति हो जाते हों,वहाँ 25 साल मुख्यमंत्री रहकर भी कोई अपने खाते में 10 हजार न जमा कर पाए,गाड़ी न खरीद पाये,बंगला न बनवा पाये,किसी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में अपने लड़के या बीबी को न बिठा पाये तो ऐसा नेता भला देश के किस काम का?
जो खुद का भला न कर सका,वो देश का या त्रिपुरा प्रदेश का भला क्या करेगा??
बेचारे के पास न तो खर्चने के लिए अकूत दौलत थी,न बाँटने को शराब और साड़ियां और न ही कार्यकर्ताओं को देने के लिए 2000 वाले पिंक नोट!!
और सामने थी बेहिसाब दौलत और बेहिसाब बाहुबल से लबरेज एक पार्टी।।
जनता भला इस गरीब,लाचार आदमी को क्यों चुनती??
जब जनता के हितों की खातिर बरसों नाक में ट्यूब लटकाए अनशन करने वाली शर्मिला इरोम को जमानत बचाने लायक नहीं बख्शा तो ये माणिक सरकार किस खेत की मूली था।।
दरसल ऐसे नेताओं की अब जगह ही नहीं भारतीय लोकतंत्र में...इन्हें खुद ब ख़ुद सन्यास लेकर घर में बैठना चाहिये।।
माणिक सरकार,ममता बनर्जी,अरविंद केजरीवाल तुम सब अयोग्य हो इस देश की राजनीति में या फिर हम सब अयोग्य हैं तुम्हारे लिए।।😴😴😴😴😴😴😴😴


अलविदा माणिक
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