शनिवार, 8 सितंबर 2018

मजहब के आड़ में राष्ट्रीयता का अपमान आखिर कब तक

क्या इस्लाम में राष्ट्रगान गाना मना हैं ? सवाल यह भी की मजहब बड़ा या देश ? इस्लाम को मानने वालो को आखिर राष्ट्रगान पर क्या हैं आपत्ति 


राष्ट्रगान , राष्ट्रगीत देश की पहचान का प्रमुख अंग हैं। जिनका सम्मान करना हर देशवासी का फर्ज हैं। लेकिन कुछ लोगों के द्वारा राष्ट्रगान के अपमान की घटनाएं सामने आती  रही हैं। लगता हैं जैसे  देश को तालिबान समझ लिया हो! यह कोई एक दो घटनाएं नहीं हैं बल्कि इनकी फेहरिस्त काफी लंबी हैं। कलकत्ता में शिक्षक की पिटाई इसलिए कर दी जाती है , उन्होनेे विद्यार्थी को राष्ट्रगान सिखाया । यह घटना दीदी के गढ़ पश्चिम बंगाल से पिछले साल की हैं। पढ़कर शायद आपको यही लगा होगा कि यह कलकत्ता भारत में या पाकिस्तान में ? एक और दुसरी घटना पर नजर दौड़ाइएं । यह हाल 15 अगस्त की घटना हैं। यूपी के महाराजगंज में मौलवी राष्ट्रगान गाने से रोक रहे हैं । उसका वीडियो भी वायरल हुआ हैं। योगी सरकार ने हुकूमत दे रखा कि हर मदरसा में विधि-विधान पूर्वक तिंरगा फहराने के साथ उसकी वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। आप इस वीडियो को देख सकते हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हैं -


मुस्लमानों के द्वारा राष्ट्र गान व गीत को नहीं गाना कोई नई बात नहीं हैं। 1950 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू राष्ट्रगान के रूप वन्दे मांतरम् को रखना चाहते थे। क्योकि उस समय देश-वासियों में वन्दे मांतरम् आजादी के संघर्ष के दौरान खून-खून में रम चूका था। लेकिन फिर बात तब अटकी जब मुस्लमानों ने धर्म का हवाला देकर इसका विरोध किया। फिर रविन्द्र नाथ टैगोर का रचित 'जन-गन-मन' को राष्ट्रगान के रूप स्वीकार किया गया।
रविन्द्र नाथ टैगोर, जिन्होने राष्ट्रगान को लिखा था

मुस्लमानों को आखिर आपत्ति क्यो ?

राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' हैं, जिसे बंकिम चन्द्र चटर्जी ने लिखा था। 'वन्दे मातरम्' का शब्दार्थ होता है - 'मां की जय हो' । तथाकथित मौलवियों का तर्क है कि हम अल्लाह के अलावा किसी की जय नही बोलते मतलब उसकी पूजा ( इबादत ) नहीं करते हैं। कुछ इसे हिन्दू धर्म से जोड़कर देखते हैं।
राष्ट्रगान में सिंध शब्द से आपत्ति बताते हैं, क्योकि यह अब देश आजादी के बाद भारत में नहीं हैं। मतलब यह अब पाकिस्तान में हैं।
यह कौनसा दौगलापन है कि राष्ट्रगान को इसलिए नहीं गाते कि इसमें दुश्मन देश के प्रांत सिंध का नाम आ रहा हैं। जरा सोचिए इस तर्क के साथ राष्ट्रगान नहीं गाना, कौनसी अक्कलमंद बात हुई। लेकिन सिंध शब्द को हटाने की भी चर्चा हुई थी। परन्तू सच्चाई यह है कि अभी तक नहीं हटाया गया हैं और हम पाकिस्तान के प्रांत का नाम ले रहे हैं।

राष्ट्रगान गाना क्यो जरूरी ?

जिस तरह भारतीय नागरिकों मूल अधिकार दिए गयें हैं। उसी तरह से कुछ फर्ज भारतीयों को दिए गये हैं, जिनका पालन करना हर भारतीय का कर्त्तव्य हैं। संविधान के भाग -  4 में नागरिकों के मूल कर्त्तव्य में राष्ट्रध्वज व राष्ट्रगान का सम्मान करना हर भारतीय का कर्त्तव्य है।
वहीं, The Prevention to National Honour Act, 1971 के तहत सार्वजनिक स्थल या ऐसी जगह जो पब्लिक के दायरे में आती हो वहां पर किसी भी तरीके राष्ट्रगान व राष्ट्रध्वज का अपमान करने पर 3 साल की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान हैं। इसमें राष्ट्रगान को लेकर विशेष निर्देश दिया गया हैं कि राष्ट्रगान को बीच में बंद करना या गाने में बाधा पहुंचाने वाला अपराधी होगा।
अणदाराम बिश्नोई
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