सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

टोंक में सचिन जीतेगा या युनूस - जरूर पढ़ें

राजस्थान की सबसे हॉट सीट बनी हुई है टोंक ...लेकिन इस सीट पर सचिन पायलट जीतेंगे या फिर युनूस खान ..इसको समझने के लिए मैं आपके सामने कुछ आंकड़े रखता हूं ...जरा समझने की कोशिश कीजिए किसके क्या खिलाफ जाएगा, क्या पक्ष में जाएगा 

सचिन v/s यूनूस खान, टोंक में सचिन जीतेगा या यूनस खान

सचिन पायलट के पक्ष में
1. जनता में संदेश कि उनके वहां से अगला मुख्यमंत्री होगा
2. अल्पसंख्यक और गुर्जर मतदाताओं के समर्थन की उम्मीद
3. 2 अप्रैल के बाद दलितों के विरोध का फायदा कांग्रेस उठाने की कोशिश करेगी
इनको मिलाया जाए तो आसानी से बहुतम का आंकड़ा सचिन पायलट को मिल जाएगा

सचिन पायलट के खिलाफ
1. सचिन पायलट टोंक से नहीं है, ये उनके खिलाफ जाएगा
2. युनूस खान के खड़े होने की वजह से मुस्लिम मतदाताओं का साथ नहीं मिलेगा
3. बीजेपी मुस्लिम नेताओं को संदेश देगी कि राजस्थान में सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी को उतारा है अगर वो भी हारा तो आगे टिकट नहीं दिया जाएगा
4. अशोक गहलोत का ये कहना कि प्रदेश में एक नहीं बल्कि 5-6 मुख्यमंत्री दावेदार हैं, सचिन के मुख्यमंत्री के दावे को कमजोर कर रहा है

युनूस खान के पक्ष में
1. युनूस खान का मुस्लिम चेहरा होना ही उनका सबसे मजबूत पक्ष है
2. 65 हजार से ज्यादा मुस्लिम मतदाता होना युनूस खान को मजबूत बनाता है
3. कांग्रेस में फूट के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा
4. पूरी सरकार यहां सचिन के खिलाफ नजर आ सकती है

युनूस खान के विरोध में
1. अजित मेहता के टिकट कटने से भीतरघात का खतरा रहेगा
2. युनूस खान के विपरीत कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद का दावेदार होना युनूस के पक्ष को कमजोर करता है
3. दलित वोट बैंक की नाराजगी युनूस खान पर भारी पड़ सकती है, जिनकी तादात 40 हजार से ज्यादा है
4. बीजेपी की 5 सालों में टोंक में नाकामी का खामियाजा युनूस खान को उठाना पड़ेगा

निष्कर्ष - सचिन पायलट अगर हारते हैं तो इसके पीछे कांग्रेस का ही हाथ होगा और अगर युनूस खान हारते हैं तो उसके पीछे मुस्लिम मतदाताओं और दलितों की बीजेपी से नाराजगी

सीनियर न्यू़ज एंकर एवं फर्स्ट इंडिया न्यूज राजस्थान के सब-एडिटर विजेन्द्र सोलंकी जी की एफबी वॉल से अनुमति के तहत



 ↔↔↔↔↔↔
🆓 आप अपना ई- मेल डालकर हमे free. में subscribe कर ले।ताकी आपके नई पोस्ट की सुचना मिल सके सबसे पहले।
⬇⏬subscribe करने के लिए इस पेज पर आगे बढ़ते हुये ( scrolling) website के अन्त में जाकर Follow by Email लिखा हुआ आयेगा । उसके नीचे खाली जगह पर क्लिक कर ई-मेल डाल के submit पर क्लिक करें।⬇⏬
फिर एक feedburn नाम का पेज खुलेगा।  वहां कैप्चा दिया हुआ होगा उसे देखकर नीचे खाली जगह पर क्लिक कर उसे ही लिखना है। फिर पास में ही " ♿complate request to subscription" लिखे पर क्लिक करना है।
उसके बाद आपको एक ई मेल मिलेगा। जिसके ध्यान से पढकर पहले दिये हुये लिंक पर क्लिक करना है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रणथंभौर से उठी जागरूकता की आवाज: सर्वाइकल कैंसर को हराने के लिए एकजुट हुए विशेषज्ञ और पत्रकार

अक्सर कहा जाता है कि जानकारी ही बचाव है, और जब बात महिलाओं के स्वास्थ्य की हो, तो सही जानकारी जीवनरक्षक साबित हो सकती है।  इसी उद्देश्य के साथ, 26 और 27 नवंबर को सवाई माधोपुर के रणथंभौर में यूनिसेफ (UNICEF) और फ्यूचर सोसाइटी ग्रुप ने एक दो-दिवसीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया।  इस महामंथन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, वरिष्ठ पत्रकारों और शिक्षाविदों ने एक सुर में कहा— "सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) लाइलाज नहीं है, बस हमें समय रहते जागना होगा ।" कार्यशाला की शुरुआत में डॉ. मनीषा चावला ने जो आंकड़े रखे, वे चौंकाने वाले हैं। भारत में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। दुनिया भर में इस बीमारी से होने वाली कुल मौतों में से लगभग एक-तिहाई अकेले भारत में होती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जानकारी का अभाव और शर्म है, जिसके चलते महिलाएं डॉक्टर के पास तब पहुंचती हैं जब बहुत देर हो चुकी होती है। भारत में सर्वाइकल कैंसर की वजह से हर दिन लगभग 200 महिलाएं इस दुनिया को छोड़कर चली जाती है। यानी हमारे देश में हर 8 मिनट में एक महिला इस रोग के कार...

डिग्री के दिन लदे, अब तो स्किल्स दिखाओं और जॉब पाओ

  भारत में बेरोजगारी के सबसे बड़े कारणों में प्रमुख कारण कार्य क्षेत्र के मुताबिक युवाओं में स्किल्स का भी नहीं होना है। साफ है कि कौशल को बढ़ाने के लिए खुद युवाओं को आगे आना होगा। क्योंकि इसका कोई टॉनिक नहीं है, जिसकी खुराक लेने पर कार्य कुशलता बढ़ जाए। स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद युवाओं को लगता है कि कॉलेज के बाद सीधे हाथ में जॉब होगी। ऐसे भ्रम में कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा हर दूसरा स्टूडेंट रहता है। आंखें तब खुलती है, जब कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद बेरोजगारों की भीड़ में वो स्वत :  शामिल हो जाते है। क्योंकि बिना स्किल्स के कॉर्पोरेट जगत में कोई इंटरव्यू तक के लिए नहीं बुलाता है, जॉब ऑफर करना तो बहुत दूर की बात है। इंडियन एजुकेशन सिस्टम की सबसे बड़ी कमी- सिर्फ पुरानी प्रणाली से खिसा-पीटा पढ़ाया जाता है। प्रेक्टिकल पर फोकस बिल्कुल भी नहीं या फिर ना के बराबर होता है। और जिस तरीके से अभ्यास कराया जाता है, उसमें स्टूडेंट्स की दिलचस्पी भी उतनी नहीं होती। नतीजन, कोर्स का अध्ययन के मायनें सिर्फ कागजी डिग्री लेने के तक ही सीमित रह जाते है।   बेरोजगारों की भी...

राजनीति में पिसता हिंदू !

कांग्रेस की जयपुर रैली महंगाई पर थी, लेकिन राहुल गांधी ने बात हिंदू धर्म की. क्यों ? सब जानते है कि महंगाई इस वक्त ज्वलंत मुद्दा है. हर कोई परेशान है. इसलिए केंद्र की मोदी सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने राष्ट्रव्यापी रैली के लिए राजस्थान को चुना. लेकिन बात जो होनी थी, वो हुई नहीं. जो नहीं होनी चाहिए थी, वो हुई. साफ है कि हिंदुस्तान की राजनीति में धर्म का चोली-दामन की तरह साथ नजर आ रहा है. भारतीय जनता पार्टी मुखर होकर हिंदू धर्म की बात करती है. अपने एजेंडे में हमेशा हिंदुत्व को रखती है. वहीं 12 दिसंबर को जयपुर में हुई कांग्रेस की महंगाई हटाओ रैली में राहुल के भाषण की शुरुआत ही हिंदुत्व से होती है. राहुल गांधी ने कहा कि गांधी हिंदू थे, गोडसे हिंदुत्ववादी थे. साथ ही खुलकर स्वीकर किय़ा वो हिंदू है लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं है. यानी कांग्रेस की इस रैली ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. बहस है- हिंदू बनाम हिंदुत्ववादी. इस रैली का मकसद, महंगाई से त्रस्त जनता को राहत दिलाने के लिए सरकार पर दबाव बनाना था. महंगाई हटाने को लेकर अलख जगाने का था. लेकिन राहुल गांधी के भाषण का केंद्र बिंदु हिंदू ही रह...