शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

सीसैट पीड़ित UPSC छात्र पांच दिन से भूख-हड़ताल पर, लेकिन सरकार कर रही अनदेखा

• युवा-हल्लाबोल द्वारा समर्थित यूपीएससी छात्र कर रहे हैं क्षतिपूरक प्रयास की मांग
• ढाई सौ से ज़्यादा सांसदों के समर्थन पत्र के बावजूद छात्रों की सुनवाई न होना सरकार के युवा विरोधी चरित्र को दर्शाता है: अनुपम
• एसएससी से लेकर यूपीएससी तक छात्रों के हर प्रदर्शन के प्रति मोदी सरकार ने दिखाया है संवेदनहीन और अलोकतांत्रिक रवैय्या: युवा-हल्लाबोल


दिल्ली | यूपीएससी परीक्षाओं में क्षतिपूरक प्रयास की मांग को लेकर दिल्ली के मुखर्जीनगर में युवा-हल्लाबोल समर्थित सीसैट पीड़ित छात्रों का प्रदर्शन आज पाँचवे दिन भी जारी रहा। मांगों को लेकर पाँच छात्रों के भूख-हड़ताल पर बैठे होने के बावजूद अब तक सरकार की तरफ़ से कोई आधिकारिक संवाद स्थापित नहीं किया गया है।

युवा-हल्लाबोल आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने बताया कि वर्ष 2011 में संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा में सीसैट प्रणाली की शुरुआत की थी, जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के प्रति भेदकारी था। बाद में निगवेकर कमिटी की रिपोर्ट ने पुष्टि किया कि सीसैट परीक्षा प्रणाली भारतीय भाषाओं के छात्र और ग़ैर-इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों के ख़िलाफ़ था। इसी अन्याय के ख़िलाफ़ छात्रों की मांग रही है कि सीसैट के कारण जिन अभ्यर्थियों के बहुमूल्य वर्ष बर्बाद हुई उन्हें दो क्षतिपूरक प्रयास दिए जाएं।

प्रदर्शन कर रहे यूपीएससी अभ्यर्थी अंशु चतुर्वेदी ने बताया कि सीसैट के कारण हुए अन्याय के ख़िलाफ़ पाँच छात्र अनशन पर बैठे हुए हैं और हम अपना प्रदर्शन तब तक जारी रखेंगे जब तक कि सरकार हमारी मांग मान नहीं लेती। बड़े अफ़सोस की बात है कि मांग मानना तो दूर सरकार की तरफ़ से अब तक कोई भी हमारी सुध लेने भी नहीं आया है।

राज्य सभा में एनसीपी सांसद द्वारा यूपीएससी छात्रों का सवाल उठाया गया लेकिन सरकार की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आया। राज्य सभा सांसद श्री संजय सिंह ने भी मुखर्जीनगर पहुँचकर पुलिसिया कार्यवाई पर सवाल उठाते हुए छात्रों की मांग का समर्थन किया।
UPSC Aspirant •1 विशाल, हरियाणा. 2 मनीष, बिहार. 3. शिखा, उत्तरप्रदेश
अनुपम ने सवाल किया कि जब यह पूर्णतः स्पष्ट हो चुका है कि सीसैट परीक्षा प्रणाली भेदकारी थी, तो इस विफल सरकारी प्रयोग से पीड़ित छात्रों को क्षतिपूरक प्रयास क्यूँ नहीं दिया जा रहा? हैरत की बात है कि ढाई सौ से भी ज़्यादा सांसदों द्वारा समर्थन पत्र के बावजूद मोदी सरकार छात्रों की मांग नहीं मान रही है। लेकिन मांग मानना तो दूर उल्टे प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ पुलिस द्वारा अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है।

एसएससी के छात्र जब सीजीओ कॉम्प्लेक्स में सड़कों पर बैठे थे तो पुलिस ने चादर, कंबल हटाने से लेकर शौचालय और पानी तक बंद कर दिया था। अब जब यूपीएससी अभ्यर्थी मुखर्जीनगर में बैठे तो इस कड़ाके की ठंढ में भी आग बुझाना, प्रदर्शनस्थल पर पानी फेंकना, ज़ोर ज़बरदस्ती और बार बार डिटेन करने जैसी कार्यवाई पुलिस कर रही है। यह मोदी सरकार की संवेदनहीनता ही नहीं, युवा-विरोध चरित्र को भी दर्शाता है।

अनुपम ने कहा कि सीसैट पीड़ित अभ्यर्थियों के साथ अगर न्याय नहीं किया गया तो यूपीएससी छात्र ही नहीं, देशभर के युवा एकजुट होकर सरकारी नीतियों पर हल्लाबोल करेंगे।

0 comments:

Thanks to Visit Us & Comment. We alwayas care your suggations. Do't forget Subscribe Us.
Thanks
- Andaram Bishnoi, Founder, Delhi TV