सोमवार, 16 सितंबर 2019

बच्चा चोरी का शक, भीड़ तंत्र के शिकार होते अनजान और ठंडे बस्ते में कानून

अफवाहों के दौर में मॉब लिंचिंग शब्द स सुर्खियों में बना हुआ है। इस शब्द के साथ एक शब्द और जुड़ गया, वह बच्चा चोर। हमारे देश में बात का बतंगड़ बहुत ज्यादा देखने को मिलता है।  बात चाहे फिर बच्चा चोरी अफवाहों की हो या फिर कच्छा धारी गैंग की। 

मोब लिंचिंग
जोधपुर (राजस्थान) : बच्चा चोरी की शक में भीड़ द्वारा युवक के नाखून निकालने की कोशिश की गई
 
देशभर में कई इलाकों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई और होती जा रही है। राजस्थान और मणिपुर सरकारों ने प्रदेश में भीड़तंत्र से होती मौतों को रोकने के लिए कानून तक बनाया। लेकिन असर क्या हुआ ? यह बड़ा सवाल है।

उदाहरण के तौर पर राजस्थान के जोधपुर जिले के फलोदी तहसील में पैदल जा रहे जातरू को भीड़ ने घेर लिया।  और बच्चा चोरी के शक में जातरू युवक की जमकर पिटाई कर दी । पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ मामला तो दर्ज कर लिया। लेकिन आरोपी पुलिस के गिरफ्त से अभी भी दूर है

वही बात करें उत्तर प्रदेश की 1 सितंबर 2019 तक प्रदेश में 45 से ज्यादा मॉब लिंचिंग के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा जुलाई 2019 से लेकर अब तक दिल्ली समेत पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और मध्य प्रदेश में भी 50 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं
 
इन तमाम घटनाओं में भीड़ तंत्र ने अनजान लोगों को शिकार बनाया। मतलब बच्चा चोरी के अफवाहों के मद्देनजर बच्चा चोर समझकर पिटाई कर दी।
 
बड़ा सवाल, आखिर यह भीड़ होती कौन ? जो इस तरह से बिना किसी पुख्ता कारणों से हर किसी की पिटाई कर देती हैं ।
कहते हैं कि भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता है। भीड़ अफवाहों से  उत्प्रेरीत होती है। यानी पुलिस के लिए भी बड़ा मुश्किल है भीड़ से आरोपियों को पहचानना।

मॉब लिंचिंग रोकने का कानून

मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अब तक देश में सिर्फ राजस्थान और मणिपुर में सरकार ने अपने स्तर पर कानून बनाया है। अगर राजस्थान में मॉब लीचिंग की घटना होती है तो कुछ इस तरह के प्रावधान किए गए हैं

भीड़ हिंसा से पीड़ित की मौत होने पर दोषियों को आजीवन कारावास और पांच लाख रुपये तक का जुर्माने की सजा भुगतनी होगी। पीड़ित के गंभीर रूप से घायल होने पर 10 साल तक की सजा और 50 हजार से तीन लाख रुपये तक का जुर्माना दोषियों को भुगतना होगा।

हिंसा से जुड़ा वीडियो, फोटो किसी भी रुप में प्रकाशित या प्रसारित करने पर भी एक से तीन साल तक की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना भुगतना पड़ेगा। भाजपा द्वारा इस विधेयक का विरोध किया गया

आप सभी से अपील हैं कि अफवाहों पर ध्यान न देकर धैर्य और विवेक का इस्तेमाल करें। यदि वाकई कोई अनहोनी होती हैं तो पुलिस को सूचित करे। सोशल मीडिया पर हर पोस्ट सत्य नहीं होती है। उसका fact check krna बेहद जरूरी है।
✍ अणदाराम बिश्नोई

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