मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

पटरी पर लौट आया प्याज !

200 रुपए से प्याज अब सस्ता हो गया है। जिसका असर रेहड़ी से लेकर होटल तक दिखने लगा है। याद कीजिए हाल ही के वो दिन, जब प्याज की जगह सलाद में खीरा और मूली परोसी गई। वाकई बहुत कठिन दौर रहा। खाने का स्वाद ही बिगाड़ दिया। खैर , अब स्थिति में सुधार हो रहा है। विदेश से प्याज का स्टॉक आने से राहत मिली है। प्याज की कीमत 50 से 60 रुपए तक देखने को मिल रही हैं।

प्याज का भाव, onion Price rate in India

प्याज क्यों हुआ सस्ता ? 

जब सितम्बर-नवंबर में प्याज की कीमतें आसमान छूने लगी, तो केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए विदेशों से प्याज मंगाया। जिसका अब नतीजा यह है कि प्याज का स्टॉक ज्यादा हो गया है। क्योंकि भारत में प्याज की उपज भी मंडियों में आना शुरू हो गई हैं। जिसके चलते कृषि उपज मंडी में औसत थोक रेट करीब 20 से 25 रुपए प्रति किलो हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, आने वाले वक्त में प्याज की कीमतों में और गिरावट होगी।

खाने का बढ़ा जायका, तो किसानों की बढ़ी चिंता

प्याज की कीमतों में गिरावट एक तरफ मध्यम वर्ग के लोगों के लिए राहत हैं, तो वहीं किसानों के माथे पर चिंता की नई लकीरें खींच दी है। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार फसल की पैदावार में अच्छी आय होगी। लेकिन उपज मंडियों में घटते प्याज के दाम उल्टा संकेत दे रहे हैं। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में रोज मंडियों में करीब 500 बोरी प्याज की आवक हो रही हैं। प्याज की आवक का दौर लगातार जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, मंडियों में नवंबर में 80 से 90 रुपए तक प्रति किलो बिक रहा था। वहीं अब प्याज फरवरी में 20 से 25 रुपए प्रति किलो थोक में बिक रहा है।

 प्याज सस्ता होने से दूसरी तरफ शहरों में लोगों को राहत मिली है। जो प्याज पहले 200 रुपए में मिल रहा था, वही अब 50 रुपए प्रति किलो बाज़ार में मिल रहा है। फाइव स्टार होटल से लेकर रेहड़ी में मिलने वाले खाने तक का जायका बढ़ गया है। मूली की जगह सलाद में अब प्याज मिलने लगा है। हो सकता है, आपको वेटर्स से थोड़ा निवेदन करना पड़ सकता है।

आयातित बड़ी खेप का अब क्या होगा ?

आपको बता दे कि विदेशों से बड़ी संख्या में मंगाई गई प्याज आधी से ज्यादा धरी की धरी रह गई है। बंदरगाहों पर सड़ रही हैं। वजह है - खेप ज्यादा होना, देशी प्याज से स्वाद कम होना और देशी प्याज की आवक। जिसके कारण लोग पसन्द नहीं कर रहे हैं।  ऐसे में राज्य सरकारें बड़ी संख्या में आयातित प्याज की खेप को लेने की मूड में बिल्कुल नहीं है। प्याज भले ही एक बार पटरी पर लौट आया है। लेकिन अब सवाल , आखिर विदेशी प्याज की बड़ी खेप का क्या होगा ?

- अणदाराम बिश्नोई


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