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जब जीना ही है तो उदास होकर क्यों

जिंदगी जीने का बहाना किसको नहीं चाहिेए. दिनभर की भागम-भाग के बीच हर कोई लाइफ में फुर्सत का पल खोजना चाहता है. जिसमें समा जाना चाहता है. जहां खुद को पा सके, महसूस कर सके, अपने आप को जान सके और हालात को देख सके. ये तभी संभव होगा, जब हम खुद के लिए वक्त निकालेंगे.

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जो अच्छा लगे उस पर ध्यान कीजिए. उम्मीद भऱी निगाहें आसमान पर डालिए. ऊंचाइयों को छूने का सपना देखिए. उसकी तस्वीर भी देख लिजिए, जो आपको सुकून देती हो.  क्योंकि इतना निरस बनकर लाइफ को यूं ही निकालने का कोई मतलब नहीं हैजरा गौर किजिए, हम सब की मंजिल मौत है. ये ही दुनिया का सबसे बड़ा सच है.

फिर हम क्यों इतने परेशान होते है ? जिस दिन आपने धरती पर पहला कदम रखा. उस वक्त आप क्या साथ लेकर आए. कुछ नहीं ना. फिर इतनी उदासी क्यों ? थोड़ा मुस्कराइए, गुलाब के फूलों की तरफ लाइफ में खुशी की महक लाइए.

आप सोच रहे होंगे कि ये संभव कैसे है, जब आगे-पीछे इतनी परेशानी खड़ी हो. बताता हूं, ऐसे संभव है. देखिए, एक दिन हम सबकों इस दुनिया को अलविदा कहना है. कोई जल्दी जाएगा तो कोई बाद में. कौन कितना जिएगा पता नहीं है. लेकिन ये जरूर मालूम है कि आज के सूरज ढलने के साथ ही हमारी लाइफ का एक दिन कम हो गया है. अब ये आपके ऊपर डिपेंड करता है कि आप ने उसे हंसी खुशी के साथ जिया या फिर यूं ही टेंशन में गंवाया.

साफ है कि यहां दो स्थिति है- अगर आपने दिन टेंशन में गुजारा है तो जरा गौर कीजिए, आपने क्या हासिल किया. कुछ नहीं... दिनभर खराब मूड में रहने के अलावा.

ये तो तय है कि हमारे हालात और परिस्थितियां हमारे हाथ में नहीं है. लेकिन हमारी सोच हमारे हाथ में है. हम रोने की बजाय हंस सकते है. टेंशन लेने की बजाय गंभीर होकर चीजों को देख सकते है.

ये सब तभी मुमकिन होगा, जब हम खुद को जानेंगे, खुद से बात करेंगे...खुद को महसूस करेंगे.  आपको जानकर हैरानी होगी कि लोग दुनियाभर की बातें जान लेंगे.  लेकिन खुद को कभी जानने की कोशिश नहीं करते है.

जिंदगी तो यूं ही चलती रहेगी. वक्त भी चलता रहेगा. जिसे कोई नहीं रोक सकता है. जब जीना ही है तो उदास होकर क्यों.

- अणदाराम बिश्नोई, पत्रकार

(फेसबुक- Andaram Bishnoi, इंस्टाग्राम- andaram.bishnoi और ट्वीटर- andaram.bishnoi)

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