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#JusticeForSumit : युवा हल्ला-बोल टीम की SSC मुख्यालय के बाहर श्रद्धांजलि सभा, कहा-एग्जाम सिस्टम की नाकामी पर कब बोलेगें PM मोदी

29 वर्षीय मेधावी नौजवान सुमित की ख़ुदकुशी से व्यथित युवा-हल्लाबोल की टीम ने दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित एसएससी मुख्यालय के बाहर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया।

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नई दिल्ली • एसएससी मुख्यालय के बाहर कैन्डेल जलाकर सुमित को श्रदांजलि देती 'युवा हल्ला बोल' की टीम

29 वर्षीय मेधावी नौजवान सुमित की ख़ुदकुशी से व्यथित युवा-हल्लाबोल की टीम ने दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित एसएससी मुख्यालय के बाहर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे छात्रों ने श्रद्धांजलि सभा में प्रण लिया कि देश में अब और सुमित नहीं बनने दिया जाएगा।

ज्ञात हो कि झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला सुमित कुमार दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर चुका था। सीजीएल 2016 की परीक्षा पास करके सुमित को इनकम टैक्स इंस्पेक्टर के तौर पर चयन हुआ था। लेकिन अगस्त 2017 में चयन हो जाने के बाद से वो लगातार अपनी नियुक्ति का इंतज़ार कर रहा था। साल भर से भी ज़्यादा समय से नियुक्ति पत्र न मिलने से वह मानसिक दबाव और डिप्रेशन के कारण फांसी के फंदे से झूल गया।

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सरकारी नौकरियों में व्याप्त भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चल रहे युवा-हल्लाबोल आंदोलन ने सुमित की दुखद मृत्यु पर घोर निराशा जाहीर करते हुए कहा कि 29 वर्ष का एक पढ़ा लिखा नौजवान एसएससी की लापरवाही और सरकार की उदासीनता के कारण ख़ुदकुशी कर लेता है।

गौरतलब है कि युवा-हल्लाबोल ने इसी वर्ष मार्च महीने में एसएससी में हुई धांधलियों के ख़िलाफ़ बड़ा राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया था। आज युवा हल्लाबोल देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं की एक महत्वपूर्ण आवाज़ और कारगर आंदोलन के रूप में उभरा है।

युवा हल्लाबोल का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने श्रद्धांजलि सभा में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि क्या हमारा देश अब किसानों की ख़ुदकुशी के साथ साथ नौजवानों की ख़ुदकुशी का दर्द भी झेलेगा? बेरोज़गार युवाओं को सपने बेचकर प्रधानमंत्री बनने वाले श्री नरेंद्र मोदी क्या इसपर एक शब्द भी बोलेंगे? एसएससी जैसे चयन आयोग कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय (डीओपीटी) के अंतर्गत आते हैं जिसका सीधा कार्यभार मोदी जी ने अपने पास रखा हुआ है, जितेंद सिंह तो सिर्फ़ राज्यमंत्री हैं। अत्यंत दुख की बात है कि हर छोटे बड़े मसले पर ट्वीट करने वाले प्रधानसेवक जी अपने मंत्रालय से जुड़े मामले पर चुप्पी साधे बैठे हैं। 'एग्ज़ाम वारियर्स' नामक किताब लिखने वाले मोदी जी अपने ही एग्ज़ाम सिस्टम का शिकार हो रहे युवाओं से कोई 'मन की बात' कब करेंगे?

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अनुपम ने मांग किया कि सरकार जल्द से जल्द अधर में लटके सभी नियुक्तियों को पूरा करके बेरोज़गार युवाओं का मानसिक उत्पीड़न बंद करे।
दिल्लीटीवी न्यूज नेटवर्क


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