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क्या खुद बांध रहे हैं आजादी को जंजीर से ,भारतीय मीडिया

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गुजरात में NDTV को केबल ऑपरेटरो द्वारा बैन करने की काना-फुसी सोशल मीडिया पर हो रही है। अब यह कितना सच है और कितना झुठ? वो तो राम ही जाने। परन्तु कहते है ना कि बिना माँस के गंध नही आती है। यही बात यहां लागु होती है,कुछ हुये बिना तो बात एसे ही चल नही सकती । ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। कई बार NDTV के साथ हो चुका है।    सच कह तो यह सब अपने लिए मीडिया खुद ही पहले से खाई खोद रही है। आजादी को खुद गंवा रही है। राजनेता के पैसे लेकर उसके गुणगान करती है। तो फिर दुसरो को दोष क्यो दे रहे हो । आप खुद आजादी चाहते ही नहीं। आप तो बस दौलत चाहते है। मीडिया का मुख्या काम जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाना और सरकार की आवाज को जनता तक पहुंचाना हैं। यानी सरकार व जनता के बीच मीडिया एक तार के भाती कार्य करता हैं। साथ ही साथ सच दिखा के सरकार को व जनता को जगाना हैं। लेकिन अब तो बस एक तरफा गुणगान करना ही काम रह गया है भारतीय मीडिया का। दिखावे तो काफी करते है परन्तु अन्दर से सब खोखले है। न्युज चैनलो में काम करने वाले पत्रकार खुद शोषित होते है। परन्तु दुसरो के लिए सुरक्षा की पंचायती करते नही थकते । भाई पहले खुद तो स

12 साल की लड़की का मिला खत,जिसे पढ़कर 'क्रिकेट के भगवान' हो गये गये भावुक,जानिये क्या था ऐसा

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वैसे तो क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले पुर्व क्रिकेटर सचिन तेन्दुलकर का हर कोई फैन है। परन्तु एक 12 साल की फैन महाराष्ट्र की रहने वाली जान्हवी नाम की लड़की ने खत लिखा जिसे पढ़कर सचिन इतने भावुक हुवे की उसे खत लिखने के लिए धन्यवाद देते हुये सोशल मीडीया पर वायरल कर दिया। पढ़िये खत मे ऐसा क्या था?? यह अग्रजी में लिखा हुआ है। लगातार ऐसे ही खबरो के किस्से कहांनियो की भरपाई के लिए उपर लिखे "सदस्यता ले " (Subscribes) पर क्लिक अपना ई-मेल डाल कर Subscribes(सदस्यता ले लेवे) कर ले।    और आप हमे  फेसबुक (क्लिक करे)  पर ही फोलो कर सकते है। Youtube पर Subscribes करने के लिए सर्च करे : DelhiTV

नोटबंधी को हुआ 1 साल, जानिए देश का क्या हुआ हाल

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8नवम्बर 2016 की शाम को कौन भूल सकता है? जिस किसी ने सुना, वही हक्का-बक्का रह गया। खासकर धन्नासेठो व अफसरशाहो की तो 'वाट' ही लग गई थी। कईयो को तो नोट बदलने के लिए 2-2 दिन तक कतारो में रहना पड़ा था। 150 से अधिक लोगो को अपनी जान की भी आहुति देनी पड़ी थी। आज भी वो दृश्य स्मृति पटल पर आने से आंसू आ जाते है। कितना दर्दनाक थे वो दिन? काम-धंधा छोड़ने पड़े मजबुरी मे लोगो को कतार मे लगने के लिए,यहां तक की बाजारो भी सन्नाटा पसर गया था।लेकिन करे तो आखिर करे क्या? क्योकी "अच्छे दिनो" की चाहत जो थी हर किसी को। जिसके कारण सब चुपचाप सहन रहे थे। मोदीजी का 50 दिन में सब कुछ ठीक होने वाले भावुक भाषण सुनकर हम जैसे लोगो की दिनभर कतार में लगने की थकान भी छु-मन्तर हो गई थी । फिर 50 दिन भी आये। परन्तु हालात में कुछ खास सुधार नजर नही आया। तो सरकार गिरगिट की तरह रंग बदलने लगी और अर्थव्यवस्था  को "कैश-लेस" बनाने के लिए नोटबंधी को अहम कदम बताने लगी।              आपको याद दिला दे की नोटबंधी करने का शुरूआत में चार उद्देश्य 1. कालाधन, 2. आंतकवाद व नक्सलवाद 3. भ्रष्ट्राचार तथा 4. जाली न

लड़की ने ली राहुल के साथ सेल्फी , फिर क्या हुआ पुछो ही मत

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भरूच | आपने शायद ही कभी राहुल को किसी जवान लड़की के साथ सार्वजनिक तस्वीर देखी होगी ।लेकिन बुधवार को भरूच गुजरात मे राहुल गाँधी के रोड शो के दौरान जो देखने को मिला जो मिला,जिससे हर कोई दांतो तले अंगुली दबा रहा है। हुआ यह की एक 10 वी क्लास की लड़की ने राहुल के साथ सेल्फी के लिए निवेदन किया तो राहुल से ने उसे जिप्सी के उपर चढ़ने में हाथ खींचकर मदद की। फिर लड़की ने सेल्फी ली। फिर एक वीडियो भी वायरल हो गया और अलग अलग एंगल से राहुल को पप्पु कह कर मजाक सोशल मीडिया पर उड़ाया जाने लगा। कुछ ने तो मोदी की फोटो ,जिसमें खिलाड़ी उनके कंधे पर हाथ रखे हुए है। उससे राहुल के कंधे पर  लड़की के हाथ रखे हुये फोटो के बीच तुलना करने लगे।