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नवंबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नजरिया- एक युवा सोच : युवाओं की सोच बदलने वाली अंकित कुंवर की पुस्तक का रिव्यू

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"नजरिया- एक युवा सोच" जैसा कि शीर्षक से ही स्पष्ट होता है कि लेखक के मन में क्या है? पुस्तक के बारे में कुछ कहने से पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि भविष्य युवाओं का ही है। जिस देश में युवा ताकतवर होंगे, वह देश ताकतवर होगा। आज राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो प्राय: सभी राजनीति दल भी इसी राह पर चल रहे हैं और युवाओं का आगे कर रहे हैं। हमारे देश में भी युवाओं की अच्छी खासी आबादी है। युवाओं में असीम ऊर्जा होती है। वह कुछ भी कर गुजरने में सक्षम होते हैं। जिसने भी युवाओं को पहचान लिया, समझो उसने भविष्य पहचान लिया। इसके बावजूद आज युवाओं के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है। सरकार की नीतियां भी युवाओं का केन्द्र में रखकर बनती हैं। युवा पीढ़ी ताकतवर रहेगी तो हम ताकतवर रहेंगे। युवा शिक्षित होंगे तो देश शिक्षित होगा। युवाओं के कंधे पर ही सब कुछ टिका है।  लेखक अंकित कुंवर स्वयं एक युवा हैं और जाहिर है कि उन्होंने इस सोच को जागरूक करने के लिए अपने लेखों का ताना-बाना बुना है। चार खंडों में विभक्त इस संग्रह में लेखक ने अपने लेखों को शामिल किया है। इन लेखों में समाज में फैली विसंगतियों को

झालरापाटन - वसुंधरा राजे या मानवेंद्र जसोल, कौन जीतेगा ? पढ़िए सटीक विश्लेषण

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झालरापाटन सीट वैसे तो वसुंधरा राजे के गढ़ के तौर पर देखी जाती है ...यहां मैं इस सीट को बीजेपी का गढ़ नहीं कह रहा हूं, ये ध्यान देने लायक है ...वहीं इस सीट पर मानवेंद्र सिंह के उतरने से क्या वसुंधरा राजे का तिलिस्म टूट जाएगा या फिर मानवेंद्र का स्वाभीमान धराशाही हो जाएगा ...इसको समझने के लिए पहले आपको यहां के जातिगत समीकरण समझने होंगे  जातिगत समीकरण : इस सीट पर करीब 40,000 मुस्लिम मतदाता, 28000 दांगी, 20000 राजपूत, 21000 ब्राह्मण, 13000 धाकड़, 21500 गुर्जर और करीब 19000 राठौर तेली मतदाता हैं....... अब आपको वो मुद्दे बताते हैं जो वसुंधरा या मानवेंद्र किसी को भी जिता सकते हैं या फिर हरा सकते हैं ... वसुंधरा राजे के पक्ष व विरोध में पक्ष में : 1. वर्तमान मुख्यमंत्री होना उनके पक्ष में है 2. 3 बार पहले भी जीत चुकी हैं, जातिगत समीकरणों को अपने और पुत्रवधु के रिश्तों के साथ साधती हैं 3. झालरापाटन में कार्यकर्ताओं पर अच्छी पकड़ है 4. झालरापाटन के विकास में अच्छी भूमिका निभाई है 5. जाट, राजपूत और गुर्जर जाति को रिश्तों के जरिए साधती हैं विरोध में : 1. एंटी इंक्बेंसी वसुंधरा

टोंक में सचिन जीतेगा या युनूस - जरूर पढ़ें

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राजस्थान की सबसे हॉट सीट बनी हुई है टोंक ...लेकिन इस सीट पर सचिन पायलट जीतेंगे या फिर युनूस खान ..इसको समझने के लिए मैं आपके सामने कुछ आंकड़े रखता हूं ...जरा समझने की कोशिश कीजिए किसके क्या खिलाफ जाएगा, क्या पक्ष में जाएगा  सचिन पायलट के पक्ष में 1. जनता में संदेश कि उनके वहां से अगला मुख्यमंत्री होगा 2. अल्पसंख्यक और गुर्जर मतदाताओं के समर्थन की उम्मीद 3. 2 अप्रैल के बाद दलितों के विरोध का फायदा कांग्रेस उठाने की कोशिश करेगी इनको मिलाया जाए तो आसानी से बहुतम का आंकड़ा सचिन पायलट को मिल जाएगा सचिन पायलट के खिलाफ 1. सचिन पायलट टोंक से नहीं है, ये उनके खिलाफ जाएगा 2. युनूस खान के खड़े होने की वजह से मुस्लिम मतदाताओं का साथ नहीं मिलेगा 3. बीजेपी मुस्लिम नेताओं को संदेश देगी कि राजस्थान में सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी को उतारा है अगर वो भी हारा तो आगे टिकट नहीं दिया जाएगा 4. अशोक गहलोत का ये कहना कि प्रदेश में एक नहीं बल्कि 5-6 मुख्यमंत्री दावेदार हैं, सचिन के मुख्यमंत्री के दावे को कमजोर कर रहा है युनूस खान के पक्ष में 1. युनूस खान का मुस्लिम चेहरा होना ही उनका सबसे मजबू

तस्वीर-ए-बयां : जोधपुर के इस स्टेशन पर गंदगी नहीं, आवारा पशु हैं बड़ी समस्या

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जोधपुर जिले के फलोदी में रेलवे स्टेशन पर सफाई अच्छी खासी मिल जाएगी लेकिन आवारा पशुओं/सांडो का आंतक बड़ी समस्या हैं। • फोटो : अणदाराम बिश्नोई

साहेब ! जुमला नहीं, जॉब चाहिए : युवा-हल्लाबोल

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2014 में मोदीजी ने हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। लेकिन हाल ही में दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना इस साल बेरोजगारी दर  बढ़ी हैं। तो वहीं हैरानी की बात यह है साढ़े चार साल में कितनी नौकरियां दी इसके सरकार के पास अधिकारिक आंकड़े भी नहीं हैं। दुसरा, जहां नौकरियां हैं वहां पर देने के बजाय उसे लटकाया जा रहा हैं। जिसके कारण युवाओं में रोष व्याप्त हैं। इसी कड़ी में युवाहल्ला टीम ने देशभर में नौकरियां की समस्याओं को लेकर आंदोलन करने का मन बनाया हैं। जिसके चलते टीम, युवाओं के बीच जाकर पंचायत का आयोजन कर रही हैं  नई दिल्ली | सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार और अवसरों की कमी के सवाल पर युवा-हल्लाबोल ने देश के कई हिस्सों में युवाओं की पंचायत का आयोजन किया। पंचायत में युवा प्रतिनिधियों ने बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन चलाने की रूपरेखा बनाई और अपने अपने शहरों में युवा-हल्लाबोल के आयोजन का निर्णय भी लिया।  ज्ञात हो कि युवा-हल्लाबोल सरकारी नौकरी में अवसरों की कमी और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चल रहा राष्ट्रव्यापी आंदोलन है। एसएससी घपले के ख़िलाफ़ भी