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नोटबंधी को हुआ 1 साल, जानिए देश का क्या हुआ हाल


8नवम्बर 2016 की शाम को कौन भूल सकता है? जिस किसी ने सुना, वही हक्का-बक्का रह गया। खासकर धन्नासेठो व अफसरशाहो की तो 'वाट' ही लग गई थी। कईयो को तो नोट बदलने के लिए 2-2 दिन तक कतारो में रहना पड़ा था। 150 से अधिक लोगो को अपनी जान की भी आहुति देनी पड़ी थी। आज भी वो दृश्य स्मृति पटल पर आने से आंसू आ जाते है। कितना दर्दनाक थे वो दिन? काम-धंधा छोड़ने पड़े मजबुरी मे लोगो को कतार मे लगने के लिए,यहां तक की बाजारो भी सन्नाटा पसर गया था।लेकिन करे तो आखिर करे क्या? क्योकी "अच्छे दिनो" की चाहत जो थी हर किसी को। जिसके कारण सब चुपचाप सहन रहे थे। मोदीजी का 50 दिन में सब कुछ ठीक होने वाले भावुक भाषण सुनकर हम जैसे लोगो की दिनभर कतार में लगने की थकान भी छु-मन्तर हो गई थी । फिर 50 दिन भी आये। परन्तु हालात में कुछ खास सुधार नजर नही आया। तो सरकार गिरगिट की तरह रंग बदलने लगी और अर्थव्यवस्था  को "कैश-लेस" बनाने के लिए नोटबंधी को अहम कदम बताने लगी।
             आपको याद दिला दे की नोटबंधी करने का शुरूआत में चार उद्देश्य 1. कालाधन, 2. आंतकवाद व नक्सलवाद 3. भ्रष्ट्राचार तथा 4. जाली नोट पर रोक लगाना था। कालाधन की  बात करे तो नोटबंधी के समय अपने देश में कुल 900 अरब डॉलर था। एक अधिकारिक संस्था के मुताबिक 5% ही कालाधन नकद में था। यानी 45 अरब डॉलर। रूपये में बदले तो होता है 3 लाख करोड़। अब सवाल यह उठता है की नोटबंधी से 3 लाख करोड़ में से कितना धन सरकार के हाथ लगा? सुत्रो के मुताबिक नोटबंधी से 1 साल में 17526 करोड़ रूपये के कालाधन के मामले सामने आ चुके है। जिन मे से 1003 करोड़ रूपये नकद तथा बिना नकद का कालाधान  यानी बेनामी संपति 600 करोड़ ही जब्त करने में सरकार को सफलता हाथ लगी है।
नोटबंधी से दुसरा फायदा यह हुआ की बैको में एक समय में बहुत सारा धन आ गया ।जिसके कारण RBI ( रिजर्व बैक ऑफ इण्डिया ) ने सरकार को 35 करोड़ रूपये का लाभांश दिया। परन्तु वहीं RBI को बैक खाताधारको को 18 करोड़ रूपये का ब्याज भी देना पड़ा। संक्षेप में कहे तो फायदे के लिए सरकार ने नोटबंधी करके जितना धन कालाधन व बेनामी संपति से लेना चाहती थी ,उससे  कई गुना ज्यादा घाटा नोटबंधी करने से जीडीपी ग्रोथ गिरने से हो गया।

         हालांकि सरकार दावा कर रही है कि कश्मीर में पत्थरबाजो में 75% कमी आई है और वहीं आंतकवाद-नक्सलवाद पर कुछ हद तक लगाम लगा है। आपको बता दे कि पिछले हाल ही के महीनो मे RBI ने नोटबंधी पर एक रिपोर्ट सौपी थी ।जिसमे कहा गया था कि नोटबंधी से 99.09 % नोट वापस आ गये थे।
                   
                    अब बात करे जाली नोटो की तो नये नोटो में ऐसा कोई फिचर्स नहीं है ,जिससे जाली नोट नहीं बनाये जा सके। 500 व 2000 के नये नोटों  आने के बाद ही बहुत सारे मामले देश में 500 व 2000 के जालि नोट पकड़ने के आने लगे थे। सरकार को नोटबंधी करते समय यह बात नही भूलनी थी की नोटबंधी से हर हमेशा के लिए  कालाधन समाप्त नही होगा। हां इतना जरूर है कि एक समय के लिए भ्रष्ट्राचारियो व कालाधन वालो की कमर टुट गई।लेकिन याद रखना ,पुन: वापस मरम्मत का काम शुरू हो गया है।
                 नोटबंधी के 1 साल होने पर सरकार ने 8 नवम्बर को एन्टी - ब्लैक मनी डे बनाया, वहीं विपक्ष ने सिर्फ "ब्लैक-डे" बनाया। इस पर पक्ष-विपक्ष का पलटवार इतना तेज हो गया था कि ज्यादातर मौन रहने वाले पुर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने  भी नोटबंधी को 'लूट' करार दिया। वहीं वितमंत्री जेटली ने  इसे कालाधन के प्रति सरकार का ऐतिहासिक नैतिक कदम बताया।
खैर, छोड़ो वो तो पक्ष-विपक्ष सत्ता की भोगी पलटवार करती रहेगी। परन्तु यह आलेख पढ़ के आपको जरूर मालुम पड़ गया होगा कि कौन सच्चा है? और कौन झुठा?

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