सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले जानिये, जीत की सुई किधर : भाजपा या कांग्रेस?

गुजरात मे मोदी लहर व विकास के नाम पर बीजेपी ने अपने खाते मे जीत दर्ज कर ली।परन्तु पिछले साल की तुलना में इस बार बीजेपी का वोट शेयर कम हो गया यानी पिछली विधानसभा 2012 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 24 लाख(लगभग) मिले थे और इस बार विधानसभा चुनाव 2017 में कम होकर 20 लाख(लगभग) ही मिले। जो यह दर्शाता है की मोदा लहर  फिकी पड़ती जा रही हैं।
           लेकिन गुजरात चुनाव के बाद अब मध्यप्रदेश,राजस्थान और छत्तीगढ़ में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। हम यहां सिर्फ अब राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 की बात करेगें। क्योकी यह पोस्ट मैने सिर्फ उसके लिए रिसर्च कर बनाई हैं। अगर आप चाहोगो की बाकी राज्यों पर भी चुनावी विश्लेषण पढ़ने को DelhiTV पर मिले,तो आप कमेन्ट कर नीचे अपनी राय रख सकते हैं।

वर्तमान मे किसकी सरकार?
अभी राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार हैं। 13 दिसम्बर 2013 को वसुन्धरा राजे सिंधिया मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठी थी।

क्या बीजेपी की होगी वापसी ?
यह सवाल अहम हैं ! इसके उपर  ही चुनाव के नतीजे  टीके हैं। इस सवाल का जवाब ढुढने के लिए हमे पहले यह समझना होगा की जब बीजेपी की सरकार आई थी तो उन्होने राजस्थान की जनता से क्या क्या बड़े-बड़े वादे किये थे -

1. युवाओ को रोजगार देना
2. किसानो को फायदा पहुचाना

यह दो वादे बीजेपी के प्रमुख थे। इसी के आधार पर जनता ने बीजेपी को वोट देकर जीताया।
राजस्थान में बेरोजगार युवा व किसान  वसुन्धरा सरकार से सबसे ज्यादा नाराज हैं परन्तु शायद बीजेपी से इतने नाराज नहीं हैं। अगर बीजेपी 2018 के विधानसभा में नये चेहरे उतारती हैं तो बीजेपी का कुछ काम आसान हो सकता हैं। परन्तु किसान तो केन्द्र की सरकार यानी मोदी से भी नाराज हैं। खासकर युवा भी।
आप सभी जानते है कि मोदी का हमेशा से हिन्दु-मुस्लिम पर राजनीति कर चुनाव जीतना का तरीका रहा हैं। जिस के प्रभाव में लोग  बहुत ज्यादा आते है, खासकर जो कट्टर हिन्दु हैं।

केन्द्र मे भी मोदी ने युवाओ व किसाने के लिए कुछ खास नही किया हैं। जिसके कारण यह बड़ा वर्ग काफी नाराज हैं।

अब यह तो साफ तौर पर दिख रहा हैकि किसान व बेरोजगार युवा राजस्थान मे काफ़ी बड़ा वर्ग हैं और यह भारतीय जनता पार्टी से नाराज हैं।

उधर कांग्रेस पार्टी लगातार बीजेपी पर आरोप लगा रही है और किसान व बेरोजगार को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रही हैं। आपको जानकारी के लिए बता दे राष्ट्रीय स्तर की दो ही पार्टी है-
1. बीजेपी ( Bhartiya Janta Party)
2. कांग्रेस

मतलब बीजेपी के लिए इस बार राह काफी मुश्किल हो रही हैं। अब तक तो सिर्फ दो कारक ( किसान व बेरोजगार युवा) जाने ,जो बीजेपी के लिए चुनावी रोड़ा बन रहा हैं। और भी कई कारक है ,उसे जानने की कोशिश करते हैं।

जातिगत ढ़ाचा : कौन किधर?
कौनसी जाति कितनी खुश व नाराज है बीजेपी सरकार से ? यह समझने के लिए साथ-साथ  यह भी जानना होगा है की राजस्थान में अलग-अलग जातियो की जनसंख्या क्या है?

1.अनुसूचित जाति :-
राजस्थान मे कुल जनसंख्या का 18%  यह जाति हैं। यानि 1 करोड़ 10 लाख जनसंख्या अनुसूचित जाति की हैं। इन जातियो को हमेशा से ही पीछे धकेला गया। हिन्दुओ की बड़ी जातियो जैसे ब्राह्मण ईत्यादि ने खुब अत्याचार व शोषण किया। इस कारण यह जातियां हमेशा से ही बीजेपी विरोधी रही हैं। क्योकि आप जानते ही कि बीजेपी को हिन्दुत्व वादी पार्टी के तौर पर देखा जाता हैं। जिससे साफ है इनका वोट बीजेपी को न जाकर  अन्य पार्टीओ जायेगा।

2. जाट :-
राजस्थान की कुल जनसंख्या का 17%  जाट है। यानी 1 करोड़ 05 लाख । जाट का मतलब किसान व खेती बाड़ी का काम करने वाला एक बड़ा वर्ग। आप को मै पहले भी पता चुका किसान वर्ग राजस्थान मे पुरी तरह से  वसुन्धरा से नाराज हैं। मतलब यहां पर भी साफ जाटो का वोट बीजेपी को नही जाने वाला हैं।

3. अनुसूचित जन जाति :-
राजस्थान की कुल जनसंख्या का 13% अनुसूचित जन जाति हैं। यानी इसका भी वोट बीजेपी को नहीं जायेगा। क्योकी यह भी वर्ग काफी नाराज रहता है हिन्दुत्ववादी पार्टी से।

4. मुस्लमान :-
राजस्थान की कुल जनसंख्या का 10% मुस्लमान है। यह शुरूआत से ही कांग्रेसी सपोर्टर रहा हैं। यहां पर भी साफ है की यह भी कांग्रेस का वोट बैंक हैं।

5. ब्रह्मण :-
राजस्थान  की कुल जनसंख्या का 7% ब्रह्मण हैं। यानी कुल 45 लाख हैं पुरे राजस्थान मे ब्रह्मण। इनके वोट सामान्यत: बीजेपी की तरफ ही रहा हैं ,जिस तरह से मुस्लमानो का कांग्रेस के तरफ। यहां पर भारतीय जनता पार्टी को वोट मिलने वाले हैं। परन्तु इसकी संख्या को पुरे राजस्थान में  बाकी कांग्रेस समर्थको से तुलना की जाये तो "ऊँट में मुँह में जीरा" हैं।

6.वैश्य :-
राजस्थान में वैश्य कुल 30 लाख हैं। यानी राजस्थान की कुल जनसंख्या का 5% । इनके बारे कुछ यह अन्दाजा नहीं लगा सकते हैं की इनका अधिकतर वोट बीजेपी के तरफ रहता हैं ़या काँग्रेस की तरफ।

7. राजपुत :-
राजस्थान की कुल जनसंख्या का 5% हैं राजपुत। यानी कुल 25 लाख।  फिल्म पद्मावत को लेकर बीजेपी के प्रति राजपुतो की काफी नाराजगी थी। हाल ही में राजस्थान मे हुये दो लोकसभा व एक विधानसभा के सीट उपचुनाव में तीनो सीटो पर अच्छे वोटो के साथ जीत हुई और सुनने यह भी आया की यह सब राजपुतो का कांग्रेस को वोट देने से हुआ। यहां पर साफ तौर कह सकते है की राजपुतो के पुरे वोट कांग्रेस को जायेगे।

8.माली :-
राजस्थान में माली कुल 5% हैं। यानी 30 लाख । वर्तमान मे राहुल गाँधी के करीबी व राजस्थान कांग्रेस के सलाहकार माने जाने वाले राजस्थान मे दोबार मुख्यमंत्री रह चूके अशोक गहलोत खुद माली समाज से आते हैं। शुरूआत से अपने देश में जातिवाद हावी रहा हैं मतलब जो अपनी जाति का होता है उसे वोट दिया जाता हैं। यह एक परम्परा रही हैं। बल्कि ऐसा ऐसा नही होना चाहिए और जनता को सोच समझकर वोट देना चाहिए।
              मैने माली समाज के कुछ लोगो से बात की ,वे सब बताते है कि "हमारा वोट हमेशा कांग्रेस को ही जाते हैं। क्योकि हमारे समाज के नेता इस पार्टी के शीर्ष नेता हैं, हमे उम्मीद रहती है कि वह हमारा कभी अहित में नही सोचते हैं।"
यानी यहां पर पलड़ा कांग्रेस का भारी दिख रहा हैं

9.विश्नोई :-
राजस्थान में विश्नोई समाज 2% हैं । यानी 12 लाख। विश्नोईयों में दो फाड़ हैं। कोई कांग्रेस के समर्थन मैं है तो कोई बीजेपी के। यानी 50-50 % कर सकते हैं।

10 . अन्य :-
यह हैं 18% ।  इनके बारे ज्यादा सर्वे नही हुआ है  यह वो लोग है जो अस्थायी रूप से घर बनाकर रहते हैं। जैसे सांसी, गाठोली लौहार,खटीक इत्यादि।
कुछ एसे है जो जंगलो में रहते है और अभी भी आदिवासी की तरह जंगलो में जीवन यापन करते हैं।

परन्तु जब कुल निष्कर्ष निकाले तो कांग्रेस की तरफ वोट ज्यादा हैं । अत: जातिगत ढांचे के आधार पर देखा जाये तो कांग्रेस की तरफ वोट देने वाली जातियो की संख्या ज्यादा हैं और राजस्थान 15वीं विधानसभा का चुनाव जीतती नजर आ रही है कांग्रेस।

एन्टीइनकम्बेंसी आ रही आड़ी
राजस्थान के पिछले 20 सालो के चुनावो पर नजर डाले ,साफ नजर आ रहा है की एन्टीइनकम्बेंसी काम कर रही है। यानी हर पांच साल बाद सरकार बदल रही हैं । आप एन्टीइनकम्बेंसी यूं समझ सकते हैं कि चुनाव से पहले जिस पार्टी की सरकार रहती हैं , वह चुनाव के बाद सरकार हार जाती हैं और पुन:  सरकार नहीं बना पाती हैं।
अब तक तो राजस्थान की जनता हर पांच साल बाद सरकार बदलती रही है। यकीन नहीं हो तो नीचे दिये आँकड़ो पर नजर दौड़ा सकते हो !

▶ 11वीं विधानसभा ( 1998-2003 , कांग्रेस की सरकार) : 1998 में 11 वीं विधानसभा के लिए हुवे चुनाव से पहले राजस्थान में बीजेपी की सरकार थी। परन्तु जब चुनाव के नतीजे आये तो कांग्रेस जीती।

▶ 12वीं विधानसभा ( 2003-2008, बीजेपी की सरकार ) :  2003 में 12 वीं विधानसभा के लिये हुवे चुनाव से पहले राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी। परन्तु जब चुनाव के नतीजे आये तो बीजेपी जीती।

▶ 13वीं विधानसभा ( 2008-2013, कांग्रेस की सरकार ) : 2008 में 13वीं विधानसभा के लिये हुवे चुनाव से पहले राजस्थान में बीजेपी की सरकार थी। परन्तु जब चुनाव के बाद नतीजे आये तो कांग्रेस जीती।

▶ 14वीं विधानसभा ( 2013- अब तक, बीजेपी सरकार ) : 2013 में 14वीं विधानसभा के लिये हुवे चुनाव से पहले कांग्रेस की सरकार थीं। परन्तु जब चूनाव के बाद नतीजे आये तो बीजेपी जीती।

इस तरह से दोनो दृष्टी से देखा जाये तो बीजेपी की हार और कांग्रेस की जीत होने के आसार 95% हैं।

लेखक व सम्पादक : अणदाराम बिश्नोई ' विद्यार्थी पत्रकारिता '
⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪⚪


🆓 आप अपना ई- मेल डालकर हमे free. में subscribe कर ले।ताकी आपके नई पोस्ट की सुचना मिल सके सबसे पहले।
⬇⏬subscribe करने के लिए इस पेज पर आगे बढ़ते हुये ( scrolling) website के अन्त में जाकर Follow by Email लिखा हुआ आयेगा । उसके नीचे खाली जगह पर क्लिक कर ई-मेल डाल के submit पर क्लिक करें।⬇⏬
फिर एक feedburn नाम का पेज खुलेगा।  वहां कैप्चा दिया हुआ होगा उसे देखकर नीचे खाली जगह पर क्लिक कर उसे ही लिखना है। फिर पास में ही " ♿complate request to subscription" लिखे पर क्लिक करना है।
उसके बाद आपको एक ई मेल मिलेगा। जिसके ध्यान से पढकर पहले दिये हुये लिंक पर क्लिक करना है।
फिर आपका 🆓 मे subscription.  पुर्ण हो जायेगा।

आपको यह पोस्ट कैसा लगा, कमेन्ट बॉक्स मे टिप्पणी जरूर कीजिए।।साथ ही अपने दोस्तो के साथ पोस्ट को शेयर करना मत भूले। शेयर करने का सबसे आसान तरीका-
☑ सबसे पहले उपर साइट मे "ब्राउजर के तीन डॉट पर " पर क्लिक करें करें।
☑ फिर  "साझा करे या share करें पर " लिखा हुआ आयेगा। उस पर क्लिक कर लिंक कॉपी कर ले।
☑ फिर फेसबुक पर पोस्ट लिखे आप्शन में जाकर लिंक पेस्ट कर दे।इसी तरह से whatsapp. पर कर दे।
आखिर शेयर क्यो करे ❔- क्योकी दोस्त इससे हमारा मनोबल बढ़ेगा।हम आपके लिए इसी तरह समय निकाल कर महत्वपुर्ण पोस्ट लाते रहेगे। और दुसरी बड़ा फायदा Knowledge बांटने का पुण्य। इस पोस्ट को शेयर कर आप भी पुण्य के भागीदार बन सकते है। देश का मनो-विकास होगा ।
तो आईये अपना हमारा साथ दीजिए तथा हमें "Subscribes(सदस्यता लेना) " कर ले    अपना ईमेल डालकर।
💪इसी तरह देश हित की कलम की जंग का साथ देते रहे।👊

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वेब सीरीज की 'गन्दगी', 'उड़ता' समाज

कोरोना काल में सिनेमा घर बंद हैं। सिनेमा घर की जगह अब ओटीटी प्लेटफॉर्म ने ली हैं। जहां वेब सीरीज की भरमार है। कई फिल्मों भी ओटीटी पर रिलीज हुई हैं। लेकिन कंटेंट पर कोई रोक टोक नहीं हैं। जिसका फायदा ओटीटी प्लेटफॉर्म जमकर उठा रहे हैं। वेब सीरीज के नाम पर गंदी कहानियां परोसी जा रही हैं। जो समाज को किसी और छोर पर धकेल रही हैं।  हाल ही में ट्राई यानी टेलीफोन रेगुलेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कहा हैं कि ओटीटी प्लेटफॉर्म जो परोस रहे हैं, उसे परोसने दो। सरकार इसमें ताक झांक ना करें।  मतलब साफ है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट पर कोई सेंसरशिप नहीं हैं और ट्राई फ़िलहाल इस पर लगाम कसने के मूड में नहीं हैं। कोरोना काल से पहले भी वेब सीरिज काफी लोकप्रिय थी। लॉकडाउन के दौर में और ज्यादा दर्शक ओटीटी प्लेटफॉर्म की तरफ आकर्षित हो गए। ओटीटी प्लेटफॉर्म का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। अब तो फिल्में भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ही रिलीज हो रही हैं। हाल ही रिलीज हुई आश्रम समेत कई फ़िल्मों को दर्शकों ने खूब पसंद किया।  लेकिन कोई रोक टोक नहीं होने से ओटीटी पर आने वाली वेब सीरीज और फिल्मों का कंटेंट सवालों के घेरे में रहत

अच्छे दिन को तरसता किसान

कृषि  को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता हैं,इस तरह की जुमले बाजी करके नेतागण वोट बँटोरने में कामयाब तो हो जाते हैं। परन्तु शुरूआत से ही छोटे,गरीब व मंझोले किसानो को दर-दर  कई समस्याओ से सामना करना पड़ रहा हैं।सरकार के द्वारा किसान-हित में की गई घोषणा-बाजी  की  कमि नहीं हैं, कमि है तो जमीनी स्तर के काम की  । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा चलाई गई ' प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना'  भी कोई खास असर नही दिखा पाई,उल्टे किसानो को लुट कर प्राईवेट बीमा कंपनियो को लाभ पहुचाया गया। किसानो को बीमा कवर के रूप में छत्तीसगढ़ में किसी को 20 रूपये तो किसी को 25 रूपये के चैंक बांटे गये।   वही हरियाणा के किसानो ने सरकार पर आरोप लगाया कि फसल बीमा योजना के नाम पर बिना बतायें ,किसानो के खाते से 2000 से 2500 रूपये तक काटे गये। लेकिन वापस मिले 20-25 रूपये । फसल की उपज लागत ,फसल की आय सें अधिक होती हैं। जिसके कारण दो वक्त की रोटी पाना भी मुश्किल होता हैं। राजस्थान के जोधपुर जिले के रणीसर ग्राम  में रहने वाले किसान सुखराम मांजू  बताते है, "पिछली बार जीरें की फसल खराब मौंसम की वजह से

आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूटते संस्कार

किसी भी देश के लिए मानव संसाधन सबसे अमूल्य हैं। लोगों से समाज बना हैं, और समाज से देश। लोगों की गतिविधियों का असर समाज और देश के विकास पर पड़ता हैं। इसलिए मानव के शरीरिक, मानसिक क्षमताओं के साथ ही संस्कारों का होना अहम हैं। संस्कारों से मानव अप्रत्यक्ष तौर पर अनुशासन के साथ कर्तव्य और नैतिकता को भी सीखता हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह हैं कि स्कूल और कॉलेजों में ये चीजें पाठ्यक्रम के रूप में शामिल ही नहीं हैं। ऊपर से भाग दौड़ भरी जिंदगी में अभिभावकों के पास भी इतना समय नहीं हैं कि वो बच्चों के साथ वक्त बिता सके। नतीजन, बच्चों में संस्कार की जगह, कई और जानकारियां ले रही हैं। नैतिक मूल्यों को जान ही नहीं पा रहे हैं।  संसार आधुनिकता की दौड़ में फिर से आदिमानव युग की तरफ बढ़ रहा हैं। क्योंकि आदिमानव भी सिर्फ भोगी थे। आज का समाज भी भोगवाद की तरफ अग्रसर हो रहा हैं। पिछले दस सालों की स्थिति का वर्तमान से तुलना करे तो सामाजिक बदलाव साफ तौर पर नज़र आयेगा। बदलाव कोई बुरी बात नहीं हैं। बदलाव के साथ संस्कारों का पीछे छुटना घातक हैं।  राजस्थान के एक जिले से आई खबर इसी घातकता को बताती हैं। आधुनिकता में प